मध्य प्रदेश के शांत और सुंदर वातावरण में चल रहे कांग्रेस के संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर के पांचवें दिन गुरुवार को एक अहम सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का विषय था “जाति, संविधान और राजनीति”। इसमें सभी जिला कांग्रेस अध्यक्षों, विधायकों और प्रशिक्षणार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य था समझना कि भारतीय समाज में जाति की भूमिका क्या रही है, संविधान ने इसके समाधान के लिए क्या रास्ते तय किए हैं और कांग्रेस पार्टी का नजरिया इस विषय पर क्या है।
सत्र को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य और झारखंड के प्रभारी के. राजू ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जाति भारत की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था का एक ऐसा पहलू है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “जाति को केवल परंपरा या पहचान के रूप में नहीं, बल्कि समानता और सामाजिक न्याय के नज़रिए से देखना चाहिए।”
समानता देने का वादा
राजू ने आगे कहा कि हमारे संविधान ने सभी को बराबरी और अवसर की समानता देने का वादा किया है। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा इस विचार को जमीनी स्तर तक उतारने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, “जब तक समाज में हर वर्ग को बराबरी का हक नहीं मिलेगा, तब तक संविधान की आत्मा पूरी तरह जीवंत नहीं होगी।” सत्र में यह भी चर्चा हुई कि जाति जनगणना केवल आंकड़े जुटाने का काम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस नीतियां बनाने का एक सशक्त जरिया है। नेताओं का मानना था कि इससे समाज के वंचित तबकों की वास्तविक स्थिति सामने आती है और उन्हें बेहतर अवसर देने की दिशा तय होती है।
समावेशी संगठन निर्माण पर जोर
प्रशिक्षण सत्र में मौजूद सभी जिला अध्यक्षों और विधायकों ने इस बात पर सहमति जताई कि संगठन को और मज़बूत बनाने के लिए समावेशी सोच अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा हर वर्ग को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है और यही उसकी असली ताकत है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने एकमत से यह दोहराया कि सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में कांग्रेस की प्रतिबद्धता सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि उसके कामकाज में भी झलकनी चाहिए।
