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फिल्म ‘हक’ पर बढ़ा विवाद, अब हिंदू उत्सव समिति ने किया समर्थन; कहा- “यह फिल्म दिखाती है तीन तलाक की सच्चाई”

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Published On: 8 November 2025

इमरान हाशमी और यामी गौतम की नई फिल्म ‘हक’ रिलीज से पहले ही सुर्खियों में है। फिल्म को लेकर जहां कुछ लोगों ने आपत्ति जताई है, वहीं अब हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच इसके समर्थन में उतर आए हैं। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि यह फिल्म समाज के सामने वह हकीकत रखती है, जिसे सालों से अनदेखा किया गया।उन्होंने कहा, “फिल्म ‘हक’ में शाहबानो केस को जिस तरह दिखाया गया है, वह इतिहास का अहम हिस्सा है। उस वक्त राजीव गांधी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद में कानून बनाकर पलट दिया था। फिल्म दिखाती है कि कैसे तीन तलाक जैसी व्यवस्था ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकार और सम्मान को छीन लिया।”

तिवारी ने आगे कहा कि यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं बल्कि एक सच्चाई की झलक है, जिसमें बताया गया है कि कैसे तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं ने औरतों को दर्द और अपमान दिया। उनका कहना है कि सनातन परंपरा में विवाह को सात जन्मों का पवित्र बंधन माना गया है, जबकि फिल्म में दिखाई गई स्थिति बताती है कि वहां स्त्री को केवल ‘उपयोग की वस्तु’ की तरह देखा गया।

समिति ने मुस्लिम महिलाओं से भी अपील की है कि वे इस फिल्म को देखें और समझें कि किस तरह तीन तलाक की प्रथा ने उनके जीवन पर असर डाला। तिवारी ने याद दिलाया कि जब संसद में तीन तलाक कानून पास हुआ था, तब सिर्फ हिंदू समाज ही नहीं बल्कि कई मुस्लिम महिलाओं ने भी राहत की सांस ली थी।

हाईकोर्ट ने नहीं लगाई रोक

फिल्म पर विवाद तब बढ़ा जब शाहबानो बेगम की बेटी सिद्दीका बेगम खान ने इंदौर हाईकोर्ट में इसकी रिलीज रोकने की मांग की। उनका कहना था कि फिल्म में उनकी मां की छवि को नुकसान पहुंचाया गया है। हालांकि, कोर्ट ने यह याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि किसी व्यक्ति का निजता और प्रतिष्ठा का अधिकार उसकी मृत्यु के साथ खत्म हो जाता है, इसे वारिस आगे नहीं बढ़ा सकते। इस आदेश के साथ ही फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया।

कहानी काल्पनिक

निर्माता जंगली पिक्चर्स की ओर से वकील अजय बागड़िया और ऋतिक गुप्ता ने कोर्ट में कहा कि ‘हक’ कोई बायोपिक नहीं, बल्कि एक काल्पनिक कहानी है जो अंग्रेजी किताब ‘बानोः भारत की बेटी’ से प्रेरित है। उनका कहना है कि फिल्म का उद्देश्य किसी धर्म या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकार और समानता पर एक चर्चा शुरू करने का प्रयास है।

क्या है फिल्म की पृष्ठभूमि?

1985 का शाहबानो केस देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस वक्त शाहबानो के पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन धार्मिक दबाव में आकर राजीव गांधी सरकार ने कानून बनाकर उस फैसले को पलट दिया। इसी घटनाक्रम ने आगे चलकर देश की राजनीति का रुख बदल दिया और अयोध्या विवाद तक की जमीन तैयार हो गई।

फिल्म रिव्यू

डायरेक्टर सुपर्ण वर्मा ने फिल्म को एक भावनात्मक लेकिन सच्चाई से जुड़ी कहानी के रूप में पेश किया है। ‘हक’ की कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की है जो पीढ़ियों से चली आ रही है धर्म, समाज और कानून के बीच अपने हक की लड़ाई लड़ती हर औरत की। फिल्म के किरदारों के जरिए यह सवाल उठाया गया है कि क्या औरत को आज भी बराबरी का दर्जा मिला है, या वह अभी भी व्यवस्था के बोझ तले दब रही है।

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