साल 2023 में Sushmita Sen के हार्ट अटैक की खबर ने देशभर को चौंका दिया था। अब एक्ट्रेस ने अपनी एंजियोप्लास्टी, उस दौरान होश में रहने और मानसिक स्थिति को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सुष्मिता ने बताया कि कैसे उन्होंने दर्द को महसूस करते हुए पूरी प्रक्रिया को देखा और क्यों वो किसी भी हाल में बेहोश नहीं होना चाहती थीं।
सुष्मिता सेन ने हाल ही में दिल का दौरा पड़ने और एंजियोप्लास्टी के अनुभव को बेहद ईमानदारी से साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उनकी हार्ट सर्जरी हो रही थी, तब वह पूरी तरह होश में थीं और उन्होंने डॉक्टरों से खुद कहा था कि उन्हें बेहोश न किया जाए। इस बातचीत ने फिर से लोगों में कार्डियक हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ाई है।
क्या महसूस किया?
एक बातचीत में सुष्मिता सेन ने बताया कि हार्ट अटैक के दौरान उन्हें साफ महसूस हो रहा था कि जिंदगी और मौत के बीच की दूरी कितनी कम होती है। वह कहती हैं कि जब इंसान होश में होता है तो उसे यह समझ आता है कि वह खतरे के कितने करीब था। सुष्मिता ने यह भी बताया कि एक मां, एक इंडिपेंडेंट वुमन और एक ब्रैंड के रूप में वह जिंदगी में काफी कुछ पीछे छोड़ आई थीं, लेकिन इस घटना ने उन्हें एहसास कराया कि अब उनसे ज्यादा कोई जिम्मेदारी नहीं उठा सकता। यही वजह थी कि उन्होंने उस समय सिर्फ “आगे बढ़ने” पर फोकस किया।
एंजियोप्लास्टी के दौरान होश में थीं सुष्मिता सेन
सुष्मिता सेन ने पहली बार बताया कि एंजियोप्लास्टी के दौरान उन्होंने खुद डॉक्टरों से कहा कि वह बेहोश नहीं होना चाहतीं। उनका कहना था कि उन्हें अपने शरीर और प्रक्रिया पर पूरा कंट्रोल रखना पसंद है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह पूरी प्रक्रिया के दौरान बेहद बेचैन थीं और लगातार डॉक्टरों से सवाल पूछती रहीं। सुष्मिता ने बताया कि उन्होंने दर्द कम करने वाली दवाएं लेने से भी मना कर दिया था, क्योंकि वह सब कुछ देखना और समझना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो ही रास्ते थे या तो होश में रहकर इस स्थिति का सामना करना या बेहोश होकर फिर कभी न जाग पाना। और उन्होंने पहला विकल्प चुना।
सुष्मिता की सोच और लक्ष्य
हार्ट सर्जरी के बाद सुष्मिता सेन की सोच में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने बताया कि इस अनुभव ने उन्हें समझाया कि जिंदगी कितनी अनिश्चित होती है, लेकिन मौके हमेशा मिलते रहते हैं। उन्होंने डॉक्टरों से भी कहा कि वह जल्दी ठीक होना चाहती हैं ताकि फिर से शूटिंग पर लौट सकें। यह वही आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती है जिसने उन्हें हमेशा एक फाइटर की तरह आगे बढ़ाया है। सुष्मिता का कहना है कि बीती चीजों पर बैठकर सोचने का कोई मतलब नहीं, खासकर जब आप उस मुश्किल से बच चुके हों। उनके मुताबिक, वह दिल के दौरे को भी एक “पार्ट ऑफ द जर्नी” की तरह देखती हैं, न कि एक डर की तरह।
