, ,

MP हाईकोर्ट सख्त, हाईवे से 500 मीटर के अंदर चल रहीं शराब दुकानों पर कार्रवाई तय

Author Picture
Published On: 20 November 2025

MP में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे चल रहीं शराब की दुकानों पर आखिरकार हाईकोर्ट सख्त हो गया है। कई सालों से लोगों की शिकायतें जारी थीं कि हाईवे के बिल्कुल पास शराब दुकानें खुली हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। अब ग्वालियर हाईकोर्ट ने साफ कहा है। 500 मीटर दायरे में दुकानें चल रही हैं, तो या तो उन्हें बंद करो या फिर तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट करो। बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र के सड़क परिवहन मंत्रालय, मप्र के आबकारी आयुक्त और आबकारी सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ्तों में जवाब देने को कहा है।

यह मामला तब सामने आया जब भोपाल की सामाजिक कार्यकर्ता राशिद नूर खान ने जनहित याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के साफ-साफ आदेशों के बावजूद हाईवे किनारे शराब दुकानें खुलेआम चल रही हैं। दुकानें सिर्फ सड़क के पास ही नहीं हैं बल्कि कई जगह लोग दुकान के बाहर खड़े होकर शराब भी पी रहे हैं।

कार्रवाई तय

याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने उन दुकानों की तस्वीरें और लोकेशन के दस्तावेज रखे, जो यह साबित करते हैं कि दुकानें हाईवे से 500 मीटर के अंदर ही संचालित की जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सीधे उल्लंघन की बात। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने कोर्ट को याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह व्यवस्था दे दी थी कि राष्ट्रीय व राज्य राजमार्ग से 500 मीटर के अंदर शराब की दुकान न हो। सड़क से दुकान दिखाई नहीं देनी चाहिए। न ही दुकान की सीधी पहुँच हाईवे से जुड़ी हो।

याचिका में यह भी तर्क

केंद्र सरकार भी 1 जून 2017 को इस संबंध में सर्कुलर जारी कर चुकी है। इसके बावजूद, 2025-26 की आबकारी नीति में कई शराब दुकानों को फिर से हाईवे के पास ही नवीनीकृत कर दिया गया। याचिका में कहा गया है कि हाईवे के किनारे ऐसी दुकानें होने से ट्रक ड्राइवर और यात्री शराब पीकर वाहनों को चलाने लगते हैं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। यह सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है। साथ ही, संविधान के अनुच्छेद 47 के भी खिलाफ है, जिसमें सरकार को शराब कम करने और जनहित की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है।

दो हफ्ते बाद फिर होगी सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि मामला गंभीर है और राज्य को इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। अब दो हफ्ते बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp