MP के सबसे बड़े एमवाय अस्पताल में नेशनल कबड्डी प्लेयर रोशनी सिंह को एक्सपायरी दवा चढ़ाने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अस्पताल की जांच समिति पहले ही यह पुष्टि कर चुकी है कि रोशनी को दो दिनों तक एक्सपायर्ड दवा दी गई थी। इसी आधार पर तीन नर्सिंग स्टाफ पर विभागीय कार्रवाई भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद यह मामला फिर से विवादों में आ गया है। मरीज की हालत बिगड़ने और परिवार द्वारा नई मेडिकल रिपोर्टें सामने लाने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डिस्चार्ज के बाद बिगड़ी हालत
रोशनी के पति सागर सिंह का कहना है कि 22 नवंबर को डिस्चार्ज होने के बाद घर लौटते ही उनकी पत्नी की हालत और बिगड़ने लगी। उन्होंने बताया कि एमवायएच की आखिरी रिपोर्ट देखने पर पता चला कि लिवर में सूजन और अन्य पैरामीटर भी खराब हैं। उनका आरोप है कि डॉक्टरों ने यह जानकारी उनसे छिपाई। स्थिति खराब होने पर रोशनी को व्हीलचेयर पर बैठाकर पति मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे। देर हो जाने के कारण उन्होंने एसडीएम प्रियमा वर्मा को शिकायत दी। इस दौरान दंपती के दो छोटे बच्चे भी साथ थे। आवेदन में अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही का जिक्र किया गया है।
रोशनी का आरोप
रोशनी का कहना है कि भर्ती के समय डॉक्टरों ने बताया था कि रिपोर्ट बहुत खराब है और स्थिति चिंता पैदा करने वाली है। इसी बीच एक्सपायरी दवा चढ़ाई गई और शिकायत करने के बाद अचानक उन्हें स्वस्थ बताकर डिस्चार्ज कर दिया गया। उन्होंने कहा, “अब मेरी हालत ऐसी है कि चल नहीं पा रही हूं। लिवर में सूजन है, हड्डियों में दर्द है, किडनी और फेफड़ों पर भी असर हुआ है। रिपोर्ट में इंफेक्शन आया है, फिर भी डिस्चार्ज क्यों किया गया?” परिवार का कहना है कि जब रोशनी अस्पताल में भर्ती हुई थीं, तब अपने पैरों पर चलकर गई थीं। लेकिन अब व्हीलचेयर पर हैं और खुद उठ-बैठ भी नहीं पा रहीं।
अधिकारियों ने दिया आश्वासन
सागर सिंह का कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें मरीज में टीबी होने की बात कही और घर पर दवा लेने का सुझाव दिया, लेकिन रोशनी की तबीयत बिगड़ती जा रही है। चार महीने से वे पत्नी की देखभाल के कारण काम पर नहीं जा पाए और अब आर्थिक रूप से कमजोर हो चुके हैं। अधिकारियों ने जनसुनवाई में उन्हें आश्वासन दिया है कि उपचार के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही आयुष्मान कार्ड के तहत सरकारी अस्पताल में आगे का इलाज करवाया जाएगा।
वीडियो बने सबूत
जब यह मामला सामने आया था, उस समय सागर सिंह ने दो वीडियो रिकॉर्ड कर प्रशासन को दिए थे। एक वीडियो में वह दवा दिख रही थी जो रोशनी को लगी थी, जबकि दूसरे वीडियो में वार्ड 21 में उसी एक्सपायर्ड लॉट की अन्य शीशियां दिखाई दे रही थीं। प्रारंभिक सफाई में अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया था कि दवा लगाने से पहले ही हटा ली गई थी। लेकिन पति ने वीडियो सार्वजनिक करके इस दावे को गलत बताया। यही वीडियो जांच में महत्वपूर्ण सबूत बने।
तीन नर्सिंग ऑफिसर पर कार्रवाई
- आसमां अंजूम : निलंबित
- नैना गौतम : वेतन वृद्धि रोकी गई
- एंजलिना विल्फेड : निंदा प्रस्ताव
इतने बड़े सरकारी अस्पताल में एक्सपायरी दवा मरीज को लग जाना एक बड़ी चूक माना जा रहा है। अब जब मरीज की हालत और बिगड़ गई है, तो दवा स्टोर की व्यवस्था, नर्सिंग स्टाफ की मॉनिटरिंग और प्रबंधन की जिम्मेदारी पर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिवार का कहना है कि जब तक पूरी पारदर्शी जांच नहीं होती और रोशनी का इलाज ठीक से शुरू नहीं किया जाता, वे संघर्ष जारी रखेंगे।
