इंदौर में गीता जयंती से पहले एक अनोखी पहल देखी गई है। शहर में पहली बार श्रीमद् भगवद् गीता को पूरी तरह पीतल पर उकेरकर तैयार किया गया है। खास बात यह है कि इसमें सभी 18 अध्याय और 700 श्लोक बेहद बारीकी से लिखे गए हैं। साथ ही युद्धभूमि कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ पूरा संवाद भी दर्ज है। इस विशेष गीता को तैयार करने वाले एडवोकेट लोकेश मंगल ने बताया कि यह काम जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी की प्रेरणा से शुरू हुआ। समर्पण से संसार प्रकाशन ने इस गीता को 29 नवंबर की रात जारी किया। पूरी किताब 54 पेजों की है और हर पेज पर श्लोक बेहद साफ अक्षरों में उकेरे गए हैं।
छपाई में लगा घंटों का समय
लोकेश मंगल ने बताया कि पीतल के एक पेज का आकार 7 इंच लंबा और 5 इंच चौड़ा है। पन्नों की कटाई में लगभग 57 मिनट का समय लगा। इसके लिए PLT फाइल तैयार करने में 6 घंटे 48 मिनट लगे। वहीं पूरी गीता की छपाई सिर्फ 2 घंटे 40 मिनट में पूरी हो गई। इस प्रोजेक्ट का फैसला 27 नवंबर को हुआ था और 28 नवंबर को पूरा काम समाप्त भी कर लिया गया। यानी महज दो दिनों में पूरी पीतल गीता तैयार हो गई।
लोकेश मंगल इससे पहले भी कई धार्मिक ग्रंथों को पीतल पर उकेर चुके हैं। उन्होंने पीतल की वाल्मीकि रामायण भी तैयार की है। यह रामायण अलग-अलग कांडों के अनुसार अलग किताबों में बनाई गई है। सभी किताबें संस्कृत भाषा में हैं और इनका कुल वजन करीब 10 से साढ़े 10 किलो तक है। इन्हें बनाने में कई दिनों की मेहनत लगी और कई विशेषज्ञों ने इसमें योगदान दिया।
साहित्य सुरक्षित रखने का प्रयास
लोकेश मंगल का कहना है कि पीतल पर ग्रंथ उकेरने का उद्देश्य धार्मिक साहित्य को एक सुरक्षित, टिकाऊ और अनोखे रूप में संरक्षित करना है। पीतल की ये किताबें आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि आगे भी वे कई अन्य धार्मिक ग्रंथों को इसी तरह पीतल पर संरक्षित करने की योजना पर काम कर रहे हैं।
