भोपाल में 18 जनवरी 2026 को “संविधान बचाओ-आरक्षण बचाओ” जन आक्रोश महाआंदोलन आयोजित किया जाएगा। राजधानी में हुई संयुक्त प्रेस वार्ता में ST, SC और OBC संगठनों ने एक स्वर में इस बड़े आंदोलन की घोषणा की। आयोजकों का दावा है कि इस रैली में प्रदेशभर से लगभग 5 लाख लोग शामिल होंगे। प्रेस वार्ता के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि यह महाआंदोलन IAS संतोष वर्मा के समर्थन में आयोजित होगा। संगठनों का कहना है कि वर्मा पर की जा रही कार्यवाही सामाजिक न्याय की मूल भावना के विपरीत है। उनका आरोप है कि एक वर्ग विशेष उनकी बयानबाजी को तोड़-मरोड़कर पेश कर सामाजिक समरसता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
जयस राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा ने बताया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान और आरक्षण व्यवस्था पर बढ़ते हमलों को देखते हुए सभी संगठनों ने संयुक्त संघर्ष का निर्णय लिया है।
महाआंदोलन के प्रमुख मुद्दे उजागर
- IAS संतोष वर्मा पर किसी भी कार्रवाई को रोकना
- ST/SC/OBC वर्गों के बैकलॉग पदों पर जल्द भर्ती
- पदोन्नति में आरक्षण पुनः लागू करना
- OBC वर्ग पर 13% होल्ड समाप्त करना
- जनसंख्या अनुपात के आधार पर भागीदारी सुनिश्चित करना
- बाबासाहेब आंबेडकर पर टिप्पणी करने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई
- संविधान विरोधी बयानबाजी करने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई
- समाज में भ्रम फैलाने वालों और माहौल बिगाड़ने वालों पर कार्रवाई
संगठनों का कहना है कि ये मांगें सिर्फ अधिकारों की बात नहीं हैं, बल्कि संविधानिक ढांचे को बचाने का प्रयास भी हैं।
जागरूकता अभियान
मुजाल्दा ने बताया कि आगामी हफ्तों में पूरे प्रदेश में संविधान जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य आमजन को आंदोलन के महत्व से जोड़ना है, ताकि अधिक से अधिक लोग 18 जनवरी को भोपाल पहुँच सकें। संयुक्त प्रेस वार्ता में ओबीसी महासभा, माझी आदिवासी समाज, भीम आर्मी, कुशवाह समाज, लोधी समाज, जयस छात्र संगठन, अजाक्स छात्र संगठन सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने कहा कि संविधान ही देश की असली शासन पद्धति है, और इसे कमजोर करने के किसी भी प्रयास का सामूहिक विरोध किया जाएगा।
भोपाल में बड़ा जुटाव
संगठनों की यह घोषणा प्रदेश राजनीति में बड़ा संदेश देती है। जनवरी के इस आंदोलन को सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और आरक्षण व्यवस्था से जुड़ी बड़ी कवायद के रूप में देखा जा रहा है। आयोजक मानते हैं कि यह केवल रैली नहीं, बल्कि सामाजिक अधिकारों की आवाज़ को राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से दर्ज कराने का मंच होगा।
