उज्जैन के जिला अस्पताल चरक भवन में इलाज के दौरान एक 55 वर्षीय मरीज की मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। मृतक के परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए हंगामा किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। नीलगंगा स्थित रतन कॉलोनी के अनिल कछावा को सुबह सर्दी, खांसी और तेज जुकाम की शिकायत पर अस्पताल लाया गया था। इमरजेंसी में जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती कर दिया। परिजनों के अनुसार, नर्स ने पर्चे पर लिखी दवाइयां और इंजेक्शन दिए, लेकिन इसके बाद भी अनिल की हालत बिगड़ती गई। उनकी सांस लगातार फूलने लगी, जिसके चलते डॉक्टरों ने उन्हें ऑब्जर्वर वार्ड से आईसीयू में शिफ्ट करने का निर्णय लिया।
अनिल के पुत्र चंदन ने आरोप लगाया कि उनके पिता को ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता थी। इसके बावजूद, जब उन्हें आईसीयू ले जाया जा रहा था, तब रास्ते में ऑक्सीजन हटाकर मरीज को बिना सपोर्ट के लिफ्ट से ले जाया गया। चंदन का कहना है कि ऑक्सीजन हटाए जाने के कुछ ही मिनटों बाद रास्ते में ही अनिल ने दम तोड़ दिया।
परिजनों का आरोप
परिजनों ने इसे अस्पताल की बड़ी लापरवाही करार दिया। उनका कहना है कि सांस फूलने की गंभीर शिकायत वाले मरीज को बिना ऑक्सीजन ले जाना किसी भी मानक प्रक्रिया के खिलाफ है और इसी गलती ने जान ले ली। मौत की जानकारी मिलते ही परिजन भड़क गए और अस्पताल स्टाफ के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को बुलाया। सीएसपी राहुल देशमुख पुलिस बल सहित अस्पताल पहुँचे और परिजनों को स्थिति समझाने की कोशिश की।
पोस्टमार्टम की सलाह
सीएसपी ने परिजनों को आश्वासन दिया कि यदि वे उपचार में लापरवाही का संदेह जताते हैं तो पोस्टमार्टम से पूरी सच्चाई सामने आ सकती है। हालांकि, परिजनों ने पोस्टमार्टम से इनकार करते हुए अंतिम संस्कार के लिए शव ले जाने की बात कही। पुलिस और अस्पताल प्रशासन की समझाइश के बाद आखिरकार माहौल शांत हुआ।
जांच की मांग तेज
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की प्रक्रियाओं पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ की लापरवाही और अधूरी व्यवस्था की वजह से मरीज की जान गई। अस्पताल प्रशासन ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। स्थानीय लोग भी अस्पताल में उपचार प्रणाली की समीक्षा और आवश्यक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
