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18 दिसंबर से इंदौर वन मंडल में बाघ गणना की शुरुआत, पहली बार दो दिन की विशेष ट्रेनिंग

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Published On: 9 December 2025

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्देश पर इंदौर वन मंडल में आगामी 18 दिसंबर से बाघों और अन्य वन्यजीवों की गणना शुरू होने जा रही है। यह प्रक्रिया 24 दिसंबर तक चलेगी। वन विभाग ने इसकी तैयारी लगभग पूरी कर ली है और इस बार रिकॉर्ड स्तर पर तकनीकी व्यवस्था जोड़ी जा रही है।

वन कर्मचारियों को पहली बार दो दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि मैदानी अमले को पहले भी आधारभूत जानकारी दी गई थी, लेकिन 11 और 12 दिसंबर को उन्हें प्रैक्टिकल अभ्यास कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि बाघ गणना के दौरान प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी एसडीओ रालामंडल योहान कटारा को और तकनीकी समन्वय की जिम्मेदारी वनरक्षक प्रवीण मीणा को सौंपी गई है।

लगाए जाएंगे 100 ट्रैप कैमरे

इंदौर वन मंडल का कुल क्षेत्रफल करीब 700 वर्ग किलोमीटर है, लेकिन बाघ गणना 200 वर्ग किलोमीटर के चयनित हिस्से में की जाएगी। इसके लिए करीब 100 ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। क्षेत्र को दो अलग-अलग ग्रिड में बांटा गया है, ताकि फोटो कैप्चर अधिक सटीक हो सके। इसमें वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WLCT) सहयोग कर रहा है।
ट्रैप कैमरा संचालन और को-ऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी WLCT के बायोलॉजिस्ट और प्रोग्राम मैनेजर विवेक तुमसरे के पास है।

चार चरणों में पूरी होगी गणना

  • पहला चरण: मैदानी सर्वेक्षण, जिसमें बाघों और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों के पदचिन्ह, मल, पेड़ या जमीन पर पंजों के निशान, शिकार के अवशेष जैसी जानकारियाँ दर्ज की जाती हैं।
  • दूसरा चरण: सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग डेटा इससे जंगल के क्षरण, अवैध कब्जों, वन्यजीव कॉरिडोर और मानव गतिविधियों के दबाव का आकलन किया जाता है।
  • तीसरा चरण: कैमरा ट्रैप चयनित ग्रिड में लगाए गए कैमरे बाघों की फोटो कैप्चर करते हैं। बाघों की अनोखी धारियों के आधार पर उनकी पहचान की जाती है और कैप्चर–रिकैप्चर तकनीक से उनकी संख्या का अनुमान लगाया जाता है।
  • चौथा चरण: डेटा विश्लेषण सभी चरणों की जानकारी को सांख्यिकीय मॉडल के माध्यम से विश्लेषित कर अंतिम वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार की जाती है।

बाघों की मौजूदगी पर नजर

वन विभाग के मुताबिक, इंदौर वन मंडल में घूमने वाले बाघ मुख्यतः धार, खंडवा और देवास के जंगलों से मूव करते हैं। ऐसे में इस गणना से यह साफ होगा कि किन इलाकों में बाघों की सक्रियता बढ़ी है और किन हिस्सों में वन्यजीव दबाव कम हुआ है। विभाग का मानना है कि इस बार कैमरा ट्रैप सिस्टम से परिणाम अधिक सटीक और वैज्ञानिक होंगे।

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