इंदौर का प्राचीन रणजीत हनुमान मंदिर, जिसकी स्थापना करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले हुई थी, इन दिनों श्रद्धा और उत्सव के रंग में रंगा हुआ है। मंदिर परिसर में 4 दिवसीय रणजीत महोत्सव की शुरुआत होते ही शहर और आसपास के क्षेत्रों से भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। यहां हर दिन विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। महोत्सव का सबसे आकर्षक आयोजन 10 दिसंबर को होगा, जब मंदिर में 51 हजार दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।
आयोजन समिति के अनुसार, पूरा परिसर दीपों की रोशनी से सुसज्जित किया जाएगा, जिससे दृश्य अद्भुत और मनमोहक बनेगा। शाम से ही भक्त दीप सजाने में शामिल होंगे और बाद में भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें स्थानीय कलाकारों के साथ कई प्रसिद्ध भजन गायक भी प्रस्तुति देंगे। आयोजकों का कहना है कि इस बार भजन संध्या को विशेष रूप से पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के साथ तैयार किया गया है।
11 लाख रक्षा सूत्रों का अभिमंत्रण
महोत्सव के तीसरे दिन 11 दिसंबर को मंदिर में महाभिषेक की पूर्ण वैदिक विधि से शुरुआत होगी। इस अवसर पर 11 लाख रक्षा सूत्रों का अभिमंत्रण भी किया जाएगा। इन रक्षा सूत्रों को बाद में भक्तों को वितरित किया जाएगा, जिन्हें संरक्षण और मंगल की कामना का प्रतीक माना जाता है। महाभिषेक के लिए सुबह से विशेष पूजन, हवन और अनुष्ठान चलेंगे। पुजारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर रक्षा सूत्र अभिमंत्रण का आयोजन इस क्षेत्र में पहली बार हो रहा है।
महोत्सव के अंतिम दिन 12 दिसंबर को रणजीत हनुमान की प्रतिमा स्वर्ण रथ में विराजमान होकर प्रभात फेरी के लिए निकलेगी। सुबह-सुबह निकलने वाली यह शोभायात्रा पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण पैदा करेगी। भक्त ढोल-ढमाकों, शंखनाद और जयकारों के साथ जुलूस में शामिल होंगे। प्रभात फेरी प्रमुख मार्गों से होते हुए मंदिर परिसर में वापस पहुंचेगी, जहां महाआरती के साथ समापन होगा।
भक्तों में उत्सुकता
महोत्सव में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए यातायात और सुरक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। मंदिर समिति का कहना है कि इस बार कार्यक्रमों को बड़े पैमाने पर व्यवस्थित और दर्शनीय बनाने की तैयारी की गई है। 4 दिनों तक चलने वाला यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इंदौर की सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान देता है।
