भोपाल-राजगढ़ बॉर्डर से लगे रुनाहा के पास बना लगभग 50 साल पुराना पुल पिछले साल अचानक धंस गया था। घटना के बाद बैरसिया से नरसिंहगढ़ आने-जाने वाले हजारों लोगों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुरक्षा के लिए पुल के दोनों ओर चार फीट ऊंची दीवारें बना दी गईं और यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया। पुल बंद होने के बाद कुछ दूरी पर ही पार्वती नदी के स्टॉपडैम को खाली कर वहां मुर्रम और गिट्टी डालकर करीब 100 मीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता बनाया गया। बारिश आने तक बसों और ट्रकों समेत सभी तरह के वाहन इसी रूट से गुजरते रहे। इस रास्ते ने लोगों की अस्थायी राहत तो दी, लेकिन असल में यह खुद एक जोखिम बनकर खड़ा हो गया।
एडीएम अंकुर मेश्राम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत इस टेम्परेरी रूट से भारी वाहनों के गुजरने पर रोक लगा दी है। आदेश में कहा गया है कि अधिक भार पड़ने से यह कच्चा रास्ता कभी भी टूट सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है। नए पुल के निर्माण तक यह प्रतिबंध लागू रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई भी तय है।
पानी भरने से फंस रही गाड़ियां
बरसात में स्टॉपडैम में पानी बढ़ने से वैकल्पिक मार्ग कई जगह डूब गया। इस दौरान कई वाहन चालक जोखिम उठाकर पानी में उतर गए और वाहन फंसते रहे। अक्टूबर में एक बस तिरछी हो गई थी, जिसे काफी मशक्कत के बाद निकाला गया। इसी सप्ताह एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पानी में जा गिरी, हालांकि सवार चार लोग बच निकले। जोखिम के बावजूद लोग रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा और बढ़ गया है।
कई जिलों को जोड़ने वाला मार्ग
बैरसिया-नरसिंहगढ़ रोड पर स्थित यह पुल केवल दो जिलों को ही नहीं जोड़ता बल्कि गुना, विदिशा, अशोकनगर, शाजापुर, आगर-मालवा, इंदौर और उज्जैन जाने वाली बड़ी संख्या में यात्री-वाहनों का ये प्रमुख मार्ग है। पुल दुरुस्त हालत में था तो रोज डेढ़ से दो लाख लोग गुजरते थे। अभी यह संख्या घटकर 8 से 10 हजार रह गई है। यह पुल आगरा-बंबई नेशनल हाईवे को भी जोड़ता है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ जाता है।
केवल 2 बार हुई मरम्मत
साल 1976 में तैयार हुए इस पुल की 49 साल में सिर्फ दो बार मरम्मत हुई। एक बार शुरुआती वर्षों में और आखिरी बार 2019-20 में… रखरखाव की कमी और बढ़ते लोड ने इसे जर्जर कर दिया। जनवरी 2024 में जब यह धंसा, तभी से इसकी मजबूती और जरूरत दोनों पर सवाल खड़े हो गए।
