संसद का शीतकालीन सत्र इस बार वंदे मातरम् को लेकर तीखी नोकझोंक का गवाह बना हुआ है। राज्यसभा में हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन नेताओं की सूची सदन में प्रस्तुत की जिन्होंने अलग-अलग मौकों पर वंदे मातरम् गाने से इंकार किया या इस पर आपत्ति जताई थी। यह सूची सामने आते ही विवाद और तेज हो गया। अमित शाह द्वारा जारी की गई इस सूची में देशभर के कई विपक्षी नेताओं के नाम दर्ज हैं। इसमें कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, नेशनल कॉन्फ्रेंस के आगा सैयद, समाजवादी पार्टी के जियाउर्रहमान बर्क, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, कांग्रेस सांसद सिद्धारमैया और आरजेडी विधायक सऊद आलम शामिल हैं। गृहमंत्री ने कहा कि इन नेताओं ने समय-समय पर वंदे मातरम् को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
आरिफ मसूद का पलटवार
सूची में नाम आने के बाद भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने कभी विरोध नहीं किया। उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा था कि वे वंदे मातरम् नहीं गा पाएंगे। मसूद ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत असमर्थता है तो उसे विरोध कैसे माना जा सकता है?
संसद में गान पर चर्चा
मसूद ने सदन में इस विषय पर चल रही चर्चा को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि देश में किसान खाद के लिए परेशान है, युवा रोजगार को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन संसद में एक गीत पर बहस हो रही है। उनके अनुसार, यह देश के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है, जिसे लेकर आम लोगों में भी असंतोष है।
विधायक मसूद ने केंद्र पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो नेता आज वंदे मातरम् पर भाषण दे रहे हैं, वे न आजादी की लड़ाई में शामिल थे और न ही उनके पूर्वजों ने तिरंगा हाथ में लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में यही लोग अंग्रेजों की कृपा पर थे और माफी मांग रहे थे। मसूद ने कहा कि आजादी के असली सिपाही तो उनके पूर्वज थे जो तिरंगा लेकर गोलियां खा रहे थे।
सत्र में माहौल गरम
वंदे मातरम् को लेकर बयानबाज़ी के बाद सत्र का माहौल और ज्यादा गरमा गया है। जहां सरकार इसे राष्ट्रगौरव का मुद्दा बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जानबूझकर बनाया गया विवाद मान रहा है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और राजनीतिक उबाल ला सकता है।
