सिंगरौली के बेरदहा कोल ब्लॉक में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, भूमि अधिग्रहण, प्रदूषण और आदिवासी विस्थापन की शिकायतों की जांच करने पहुंची अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की तथ्य अन्वेषण समिति को पुलिस और प्रशासन ने आगे बढ़ने ही नहीं दिया। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि उन्हें पीड़ितों से मिलने तक की अनुमति नहीं दी गई, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया। तथ्य अन्वेषण समिति में मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, CWC सदस्य कमलेश्वर पटेल, उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे, पूर्व उपाध्यक्ष हीना कावरे, आदिवासी कांग्रेस प्रमुख विक्रांत भूरिया, CWC सदस्य ओंकार मरकाम, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह और बाला बच्चन समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। पुलिस की रोक के बावजूद प्रतिनिधिमंडल ने अलग-अलग रास्तों से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
पर्यावरणीय संकट के संकेत
देवसर और सिंगरौली इलाके के कई ग्रामों में कांग्रेस नेताओं ने लोगों से सीधे बातचीत की। गजरा बहरा गाँव में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिग्रहण को लेकर दिखावटी सहमति दिखाई जाती है, जबकि असल में ग्रामवासियों से दबाव में हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोल यार्ड और खदानों से उठने वाली धूल ने पूरे इलाके के स्वास्थ्य पर संकट खड़ा कर दिया है। कई परिवारों में बच्चे सांस की बीमारियों और आँखों की जलन से पीड़ित हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण किया, जहाँ सुविधाओं का भारी अभाव और खतरनाक प्रदूषण का असर साफ दिखाई दिया। बच्चों को धूलभरे वातावरण में पढ़ना पड़ रहा है और शिक्षक भी खुले तौर पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की बात कर रहे हैं।
उद्योगपतियों के हित साधने का आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर जंगलों को निजी कंपनियों को सौंप रही है। उन्होंने कहा, “4000 हेक्टेयर प्लांट के नाम पर 10 लाख से ज्यादा पेड़ों को काटा जा रहा है। एक पेड़ माँ के नाम और पूरा जंगल अडानी के नाम यही सरकार की नीति है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि मध्यप्रदेश में ‘10 हजार एकड़ का अडाणी देश’ बना दिया गया है, जहाँ आम नागरिक का प्रवेश भी प्रतिबंधित है।
देखिए, मोदी-मित्र #Adani कैसे #सिंगरौली में जल/जंगल/जमीन उजाड़ रहा है! pic.twitter.com/M52WgfoLSl
— MP Congress (@INCMP) December 11, 2025
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारें सिर्फ एक उद्योगपति के हितों के लिए फैसले ले रही हैं। उनके अनुसार, जंगलों का विनाश और आदिवासियों का विस्थापन एक संगठित नीति का हिस्सा बन चुका है, जिसमें पर्यावरणीय कानूनों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठाने की घोषणा
कांग्रेस ने कहा है कि सिंगरौली में जारी पर्यावरण संकट, ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव और आदिवासी समुदाय के अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा, ताकि प्रभावित परिवारों को न्याय मिल सके।
