सतना जिले में उपार्जन केंद्रों पर घटिया धान को पास कराने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। यह पहला मौका नहीं है जब निरीक्षण में खराब गुणवत्ता का धान पकड़ा गया हो। सूत्रों का दावा है कि जिले के लगभग 90 प्रतिशत खरीदी केंद्रों पर समिति प्रबंधकों और सर्वेयरों के बीच सेटिंग कर बदरे और निम्न गुणवत्ता वाले धान को भी पास करा दिया जाता है। यह खेल लंबे समय से चल रहा है और इससे शासन को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
इस बार जांच की कमान खुद नागरिक आपूर्ति निगम (नॉन) के जिला प्रबंधक पंकज बोरसे के हाथों में थी। निरीक्षण के दौरान कई केंद्रों पर एफएक्यू मानकों के विपरीत धान स्टॉक मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई की गई। दो सर्वेयरों को खराब धान को स्वीकृत करने का दोषी पाया गया और उनकी सेवाएं तुरंत समाप्त कर दी गईं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई आगे के लिए कड़ा संदेश है।
मिली बड़ी अनियमितता
जांच के दौरान हाटी उपार्जन केंद्र में पाया गया कि सर्वेयर राजीव नयन सिंह ने गैर-मानक गुणवत्ता (नॉन-एफएक्यू) धान को भी स्वीकृति दे दी थी, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसी तरह स्वाति वेयरहाउस उचेहरा में सर्वेयर रोहित सिंह ने घटिया धान को गोदाम में भंडारित करा दिया था। दोनों मामलों में धान की गुणवत्ता इतने खराब स्तर की थी कि इसे किसी भी हाल में उपार्जन की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी।
जांच जारी
जिला प्रबंधक पंकज बोरसे ने दोनों सर्वेयरों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी किया। विभाग ने यह साफ कर दिया है कि आगे भी ऐसी जांचें लगातार चलेंगी और किसी भी केंद्र पर गड़बड़ी पाई जाने पर कठोर कार्रवाई होगी। फिलहाल, अन्य उपार्जन केंद्रों के रिकॉर्ड और स्टॉक की भी गहराई से जांच की जा रही है।
बचाने की कवायद
स्थानीय किसानों और कर्मचारी सूत्रों का कहना है कि अब तक घटिया धान को पास कराने का खेल सालों से चलता रहा है। समिति प्रबंधक और सर्वेयर मिलकर धान की गुणवत्ता से खिलवाड़ करते हैं और इसका सीधा असर शासन की आर्थिक हानि के रूप में सामने आता है। डीएम नान द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई को लोग सराहनीय मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि यह सख्ती आगे भी जारी रहेगी। जिले में उपार्जन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए अब प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
