पौष मास की अमावस्या सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन स्नान-दान, पितृपूजा और पिंडदान करने से जीवन में चल रहा दुख-दुर्भाग्य दूर होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से किसी पवित्र जल तीर्थ में स्नान कर दान-धर्म करने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। पौष कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि को पड़ने वाली यह अमावस्या अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है।
सनातन परंपरा के अनुसार किसी भी मास के कृष्णपक्ष की पंद्रहवीं तिथि को “अमावस्या” कहा जाता है। पौष मास की यह अमावस्या विशेष रूप से पितृपूजा, स्नान-दान और तर्पण के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस साल की पौष अमावस्या 19 दिसंबर को है।
पौष अमावस्या
सनातन परंपरा में पौष मास के कृष्णपक्ष की पंद्रहवीं तिथि को पड़ने वाली पौष अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। यह तिथि इस वर्ष अत्यंत शुभ मानी जा रही है, क्योंकि इसे स्नान-दान, पितृपूजा और तर्पण के लिए बेहद फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है। श्रद्धालु सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जल तीर्थों की ओर रुख करते हैं और पितरों की शांति के लिए तर्पण करते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार पौष अमावस्या पर किए गए कर्म और पूजा विशेष फल प्रदान करते हैं, इसलिए देशभर में भक्तगण इस तिथि पर धार्मिक अनुष्ठानों में जुट जाते हैं।
कब है पौष अमावस्या
पंचांग के अनुसार पौष मास की अमावस्या तिथि इस वर्ष 19 दिसंबर 2025, शुक्रवार की प्रातः 04:59 बजे से शुरू होकर 20 दिसंबर 2025, शनिवार की प्रातः 07:12 बजे तक रहेगी। अमावस्या वह तिथि होती है जब आसमान में चंद्रमा दिखाई नहीं देता और इसे पितरों का दिन माना जाता है। चूंकि उदयातिथि के अनुसार पर्व 19 दिसंबर को पड़ेगा।
करें ये काम
- पौष मास की अमावस्या को हिंदू परंपरा में पितरों की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर माना गया है।
- मान्यता है कि इस दिन पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से उन्हें तृप्ति मिलती है।
- और घर-परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
- इसी के साथ पौष अमावस्या पर स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है।
- श्रद्धालु गंगा, यमुना, गोदावरी जैसे पवित्र जलतीर्थों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं।
- माना जाता है कि जरूरतमंदों को काले कंबल, काला छाता, वस्त्र, अन्न और धन का दान करने से न केवल शुभ फल प्राप्त होते हैं।
- शनि, राहु और केतु से जुड़े दोष भी दूर होते हैं।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
