इंदौर के नामचीन होलकर विज्ञान महाविद्यालय में चल रही इंटर्नशिप प्रक्रिया पर सवालों का पहाड़ खड़ा हो गया है। जयस छात्र संगठन (JCS) ने इंटर्नशिप से जुड़ी कथित अनियमितताओं, अवैध वसूली और लापरवाही को लेकर प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा है। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन को दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने की चेतावनी भी दी है। संगठन का कहना है कि कॉलेज प्रशासन ने किसी तरह की निविदा या पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए बिना एक निजी कंपनी के साथ MOU कर लिया। छात्रों का आरोप है कि उनसे कहा जा रहा है कि “रसीद नहीं लाओगे तो मार्क्स नहीं मिलेंगे”, जिससे मजबूर होकर कई विद्यार्थियों को फीस जमा करनी पड़ी।
एपीजे अब्दुल कलाम भवन को इंटर्नशिप संचालित करने वाली निजी कंपनी को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने पर भी संगठन ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इससे कॉलेज को कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ, जो पूरे प्रकरण पर गंभीर शंकाएं खड़ी करता है।
पढ़ाई हुई प्रभावित
छात्रों ने बताया कि इंटर्नशिप की बाध्यताओं के चलते नियमित कक्षाएँ प्रभावित हुईं। कई बैचों की पढ़ाई लंबी अवधि तक प्रभावित रहने से छात्र शैक्षणिक दबाव और अनिश्चितता में फंस गए। JCS का दावा है कि इंटर्नशिप के नाम पर 1000 से 1500 रुपये की वसूली की गई, जबकि सरकारी कॉलेजों में ऐसी कोई फीस निर्धारित नहीं होती। संगठन का कहना है कि इस फीस की कोई आधिकारिक रसीद, विवरण या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
फर्श पर मिली छात्रों की फाइलें
कुछ छात्रों की इंटर्नशिप फाइलें कॉलेज में फर्श पर बिखरी मिलीं, जिसे संगठन ने गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया। छात्रों के रिकॉर्ड को ऐसे रखने पर उनकी गोपनीयता और मूल्यांकन पर भी सवाल उठे हैं।
संगठन ने आरोप लगाया कि फीस का विरोध करने वाले छात्रों को धमकाया गया। इतना ही नहीं, JCS पदाधिकारियों ने भी धमकियों की शिकायत की। इसके साथ ही, जिस व्यक्ति की निजी कंपनी को इंटर्नशिप का काम दिया गया, उस पर पहले आपराधिक गतिविधियों से जुड़े आरोप होने का दावा भी किया गया है। संगठन ने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति को कॉलेज परिसर में स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति कैसे मिली।
ज्ञापन लेने से बचता रहा प्रशासन
छात्रों के अनुसार, जब वे ज्ञापन देने पहुंचे तो प्राचार्य अनामिका जैन उनसे मिलने से बचती रहीं। कई अधिकारी ज्ञापन लेने को तैयार नहीं थे, जिनमें प्रशासनिक अधिकारी नागेश डगांवकर भी शामिल हैं। इस रवैये ने छात्रों में और आक्रोश पैदा कर दिया। संगठन ने पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच, कॉलेज प्रशासन और निजी कंपनी पर FIR, अवैध रूप से वसूली गई राशि की वापसी और दोषियों पर विभागीय कार्रवाई की मांग की है। JCS ने चेताया है कि यदि 48 घंटे में जवाब नहीं मिला तो वे शांतिपूर्ण लेकिन कठोर आंदोलन शुरू करेंगे।
