आज है पौष माह की कृष्ण पक्ष दशमी तिथि, शुभ संयोग से बनाएं जीवन में सुख शांति; जानें धार्मिक महत्व

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Published On: 14 December 2025

14 दिसंबर को पौष माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रहेगी। इस दिन शुभ संयोग बन रहा है, क्योंकि तिथि के साथ हस्त नक्षत्र और सौभाग्य योग का मेल होगा, जिसे ज्योतिष शास्त्र में विशेष फलदायी माना जाता है। दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो रविवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी महत्वपूर्ण और मांगलिक कार्य के लिए अनुकूल माना गया है।

आज पौष माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। इस तिथि में कई लोग विशेष रूप से पूजा-उपासना करते हैं तथा अपने धार्मिक कृत्यों का आयोजन करते हैं ताकि जीवन में सौभाग्य, शांत मन और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सके।

कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि

पौष मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि इस साल 14 दिसंबर रविवार को पड़ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की दशमी यानी चंद्रमा की दसवीं तिथि अँधेरी चंद्रिमा (कम होती हुई चंद्र अवस्था) के दौरान आती है और यह तिथि 13 दिसंबर की शाम से शुरू होकर 14 दिसंबर शाम तक रहती है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से दशमी तिथि का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह दिन पूजा-अर्चना, व्रत, पुण्य कर्म और शांति हेतु अनुकूल माना जाता है।

महत्व

कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि हिंदू पंचांग में महीने के कृष्ण पक्ष का दसवाँ दिन होता है, जब चंद्रमा की क्रीमा क्रमशः घटकर दसवें चरण पर पहुँच जाती है। इस तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व माना जाता है। दशमी को कई कारणों से पवित्र और शुभ माना जाता है, यह योग और ध्यान, आत्म-निरीक्षण, और दोषों से मुक्ति का समय होती है। लोकपरंपरा में इस दिन ध्यान, पूजन, जप और दान का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह व्यक्ति के मन और भावनाओं को संतुलित करने, दोषों को दूर करने और सही मार्ग पर चलने में सहायता करती है।

पूजा विधि

  • पौष माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • इसके बाद चौकी पर भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव की प्रतिमा स्थापित कर दीप प्रज्वलित करें।
  • पूजा में अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • दशमी तिथि से जुड़े व्रत-कथा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करें।
  • माना जाता है कि इस विधि से पूजा करने पर ग्रह दोषों में शांति और जीवन में सकारात्मकता आती है।

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।

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