धर्म ग्रंथों के अनुसार पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है, जिसका महत्व अनेक पुराणों में वर्णित है। मान्यता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की महिमा बताई थी। सफला एकादशी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इस वर्ष सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर, सोमवार को श्रद्धा और विधि-विधान के साथ रखा जाएगा।
इस बार सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर को रखा जाएगा। धर्म ग्रंथों और विभिन्न पुराणों में इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि सफला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है, साथ ही भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है।
सफला एकादशी
पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है। धर्म ग्रंथों और पुराणों में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस एकादशी के महत्व के बारे में बताया था। इस व्रत को करने से जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त होती है तथा हर कार्य में सकारात्मक परिणाम मिलने की कामना पूरी होती है।
महत्व
सफला एकादशी हिंदू धर्म में पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के रूप में अत्यंत पवित्र और शुभ दिन माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु (श्रीहरि) की विधि-विधान से पूजा और व्रत रखते हैं, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और सफलता प्राप्त होने की परंपरागत मान्यता है। पुराणों के अनुसार यह व्रत पापों के नाश, मनोवांछित फल की प्राप्ति और आत्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है; साथ ही संयम, ध्यान तथा भक्ति के माध्यम से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। एकादशी के दिन दान-धर्म, कथा श्रवण और जागरण जैसे पुण्यकर्मों का पालन करने से श्रद्धालुओं को विशेष फल मिलने की भी धारणा है। धार्मिक परंपरा में यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु को राजा आकार में समर्पित माना जाता है, और इसका पालन करने से परमपुण्य की प्राप्ति होती है।
शुभ मुहूर्त
सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर (सोमवार) को रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 14 दिसंबर की शाम लगभग 6:49 बजे से शुरू होकर 15 दिसंबर की रात लगभग 9:19 बजे तक रहेगी, इसलिए उद्या तिथि के आधार पर व्रत 15 दिसंबर को ही उचित माना जाता है।
पूजा विधि
- सफला एकादशी के दिन व्रत-पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लेना चाहिए
- दिनभर सत्य, संयम और शांति के साथ व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए।
- पूजा से पहले सभी सामग्री एकत्र कर घर के पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल या गोमूत्र से शुद्ध करें।
- शुभ मुहूर्त में लकड़ी के पटिए पर वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें,
- उन्हें पुष्पमाला पहनाकर तिलक लगाएं और घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद फूल, फल, अबीर, गुलाल, रोली आदि अर्पित करते हुए ‘ॐ नमः भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और तुलसी पत्र सहित भोग लगाएं।
- अंत में विधि-विधान से भगवान विष्णु की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. MPNews इनकी पुष्टि नहीं करता है।
