इंदौर में रविवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित प्रशासनिक बैठक के दौरान उस समय माहौल हल्का-फुल्का, लेकिन सियासी रंग में रंग गया, जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से इंदौर के प्रभारी मंत्री को लेकर सीधी टिप्पणी कर दी। विजयवर्गीय ने कहा कि अच्छा हुआ, आपने साफ कर दिया कि आपके पास इंदौर का प्रभार नहीं है। गजट में आपका नाम लिखा था, इसी वजह से अधिकारी हमें आपका नाम लेकर चमकाते रहते थे।
विजयवर्गीय की इस बात पर मुख्यमंत्री मुस्कुराए और सहज अंदाज में जवाब दिया कि जिसको जो देना था, दे दिया। जो बचा है, वह मेरे पास है। इस टिप्पणी के बाद सभागार में हल्का हास्य का माहौल बन गया। CM ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में जिन जिलों के प्रभारी तय नहीं हैं, उनकी जिम्मेदारी फिलहाल उनके पास ही है और इंदौर उन्हीं जिलों में शामिल है।
इंदौर का प्रभारी
बैठक के दौरान विजयवर्गीय ने हंसते हुए कहा कि इंदौर में अधिकारी अक्सर प्रभारी मंत्री का नाम लेकर दबाव बनाते थे, लेकिन वे हमेशा मुख्यमंत्री को ही इंदौर का प्रभारी मानते आए हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने फिर दोहराया कि जिन जिलों का प्रभार खाली है, वह सीधे उनके अधीन हैं। बैठक से पहले विजयवर्गीय ने मेट्रो प्रबंधन को भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने मेट्रो एमडी कृष्ण चैतन्य को बुलाकर कहा कि बैठक में वही रूट रखा जाए, जो पहले तय हो चुका है। अंडरग्राउंड रूट में कोई बदलाव या नया विकल्प सामने न रखा जाए। उन्होंने खर्च का पूरा ब्यौरा रखने की भी बात कही, ताकि मुख्यमंत्री के सामने कोई भ्रम की स्थिति न बने।
“हर क्षेत्र में निरंतर विकास के साथ इंदौर बन रहा देशभर के लिए आदर्श”
आज इंदौर में महाराजा यशवंतराव अस्पताल के नवीन भवन का भूमिपूजन कर कार्यक्रम को संबोधित किया।
प्रसन्नता का विषय है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में विभाग द्वारा निरंतर ठोस और प्रभावी… pic.twitter.com/K9z93JC0Mn
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) December 14, 2025
पर्चियों से चलता रहा संवाद
बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी एक रोचक दृश्य देखने को मिला। मंच पर बैठे विजयवर्गीय ने पास बैठे सांसद से पेन लेकर बार-बार पर्चियां लिखीं और मुख्यमंत्री तक पहुंचाईं। यह सिलसिला चार-पांच बार चला, जिसे देखकर मौजूद लोग आपस में चर्चा करते नजर आए। अधिकारियों को लेकर विजयवर्गीय की तीखी टिप्पणियां नई नहीं हैं। इससे पहले वे कलेक्टर शिवम वर्मा को लेकर भी सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि वे फोन पर सिर्फ “हां” कहते हैं, लेकिन काम नहीं करते। यही नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी उन्होंने मंच से तीखा राजनीतिक संदेश दिया था।
