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मैहर जिला बैठक में सियासी तल्खी, पूर्व विधायक के बयान पर गरमाया माहौल

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Published On: 15 December 2025

मैहर में आयोजित जिला विकास एवं सलाहकार समिति की बैठक उस वक्त विवादों में आ गई, जब अमरपाटन के पूर्व विधायक रामखेलावन पटेल ने शासकीय अधिकारी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। प्रभारी मंत्री राधा सिंह की अध्यक्षता में चल रही बैठक में अचानक राजनीतिक तल्खी देखने को मिली, जिससे कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।बैठक के दौरान पूर्व विधायक रामखेलावन पटेल ने रामनगर के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे कर्मचारियों का वेतन जारी नहीं कर रहे हैं। इसी बात को रखते हुए उन्होंने सीएमओ की तुलना “सद्दाम हुसैन” से कर दी। बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच इस टिप्पणी को लेकर असहजता साफ नजर आई।

अमरपाटन विधायक राजेंद्र सिंह ने तुरंत इस बयान पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि किसी भी लोक सेवक के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल न सिर्फ असंसदीय है, बल्कि गरिमा के भी खिलाफ है। राजेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि आलोचना की अपनी मर्यादा होती है और व्यक्तिगत या अपमानजनक तुलना स्वीकार नहीं की जा सकती।

कलेक्ट्रेट भवन को लेकर हुई बहस

सीएमओ के मुद्दे के बाद दोनों नेताओं के बीच धतूरा क्षेत्र में प्रस्तावित कलेक्ट्रेट भवन को लेकर भी बहस छिड़ गई। भवन के स्थान चयन और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए गए, जिस पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक की स्थिति बन गई। बैठक में मौजूद अन्य सदस्य भी स्थिति को लेकर सतर्क दिखाई दिए। मामले के बढ़ते तनाव को देखते हुए सांसद ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट भवन से जुड़ा विषय पहले ही मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जा चुका है और वहां इस पर विचार किया जा रहा है। सांसद की इस बात के बाद बैठक का माहौल कुछ हद तक शांत हुआ और चर्चा आगे बढ़ सकी।

राजनीतिक बयानबाजी पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठने लगे हैं कि शासकीय बैठकों में भाषा और मर्यादा का पालन कितना जरूरी है। बैठक का उद्देश्य विकास योजनाओं की समीक्षा था, लेकिन बयानबाजी और आपसी टकराव के चलते असली मुद्दे कुछ देर के लिए पीछे छूटते नजर आए। जिला विकास समिति की यह बैठक एक बार फिर इस बहस को सामने ले आई कि जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखते समय शब्दों की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। शासकीय मंच पर दिए गए बयान न केवल प्रशासनिक माहौल को प्रभावित करते हैं, बल्कि आम जनता में भी गलत संदेश जाने की आशंका रहती है।

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