Kisan News: फंदा विकासखंड के ग्राम डंगरौली, टांडा सांकल और जमुनियाकलां में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से रूबरू कराने के लिए विशेष प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। आत्मा परियोजना के तहत आयोजित इस कृषक पाठशाला में किसानों के खेतों पर ही धान कटाई के बाद सुपर सीडर मशीन से गेहूं की सीधी बुवाई कर दिखाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद रहे, जिन्होंने खेत में मशीन को चलते हुए नजदीक से देखा।
इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ाना था। अधिकारियों ने बताया कि पराली जलाने से जहां मिट्टी की सेहत खराब होती है, वहीं पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। सुपर सीडर मशीन धान के बचे हुए अवशेषों को काटकर मिट्टी में मिला देती है, जिससे बिना आग लगाए समय पर गेहूं की बुवाई संभव हो पाती है।
एक मशीन कई काम
कृषि अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि सुपर सीडर एक ही बार में कई काम करता है। यह मशीन खेत की हल्की जुताई करती है, बीज की बुवाई करती है और साथ ही खाद भी डाल देती है। इससे न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि मजदूरी और डीजल पर आने वाला खर्च भी कम हो जाता है।
खेत में दिखा असर
प्रदर्शन के दौरान जब मशीन भारी मात्रा में पड़े धान के अवशेषों के बीच आसानी से काम करती नजर आई, तो किसान खासे प्रभावित हुए। कई किसानों ने बताया कि पहले पराली के कारण बुवाई में दिक्कत आती थी, लेकिन इस तकनीक से वह समस्या खत्म होती दिख रही है। खेत में बेहतर लाइन में गिरता बीज और अवशेषों का मिट्टी में मिलना किसानों के लिए नया अनुभव रहा।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने बीज दर, मशीन की सेटिंग, खाद प्रबंधन और लागत से जुड़े सवाल पूछे। कृषि विशेषज्ञों ने मौके पर ही सभी शंकाओं का समाधान किया। किसानों को बताया गया कि सही सेटिंग के साथ सुपर सीडर का उपयोग करने पर अंकुरण अच्छा होता है और पैदावार बढ़ने की संभावना रहती है।
भविष्य की खेती को लेकर उत्साह
कई किसानों ने कहा कि वे आने वाले मौसम में इस तकनीक को अपनाना चाहते हैं। कुछ किसानों ने गेहूं कटाई के बाद मूंग की बुवाई में भी सुपर सीडर के उपयोग की इच्छा जताई। अधिकारियों ने किसानों को कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी योजनाओं की जानकारी दी और पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊ खेती अपनाने की अपील की।
