इंदौर की होनहार खिलाड़ी भूमि अग्रवाल ने साउथ अफ्रीका में आयोजित मॉडर्न पेंटाथलॉन वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए भूमि ने एक ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चार पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। वह ऐसा करने वाली मध्यप्रदेश की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।रविवार को जब भूमि इंदौर लौटीं तो कॉलोनीवासियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और फूल-मालाओं के साथ जुलूस निकाला गया। हर कोई इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा था और बेटी की सफलता को शहर की जीत बताया गया।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भूमि ने पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सीधे चार पदक अपने नाम कर लिए। उन्होंने व्यक्तिगत बायथल स्पर्धा में स्वर्ण, ट्रायथल में रजत पदक जीता। इसके अलावा बायथल मिक्स्ड रिले और ट्रायथल मिक्स्ड रिले में कांस्य पदक हासिल किए।
खेल में शानदार प्रदर्शन
मॉडर्न पेंटाथलॉन को सबसे कठिन खेलों में गिना जाता है। बायथल इवेंट में 800 मीटर दौड़, 100 मीटर तैराकी और फिर 800 मीटर दौड़ पूरी करनी होती है। वहीं ट्रायथल में स्विमिंग, साइक्लिंग और रनिंग शामिल रहती है। भूमि ने इन सभी चुनौतियों को बखूबी पार किया। शिशुकुंज स्विमिंग एकेडमी से प्रशिक्षण लेने वाली भूमि ने इंदौर में हुई नेशनल बायथल प्रतियोगिता में स्वर्ण और रजत पदक जीते थे। इसी प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए हुआ, जहां उन्होंने खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित कर दिया।
मिली असली परीक्षा
भूमि ने बताया कि प्रतियोगिता में रेत पर दौड़ना और खुले पानी में तैराकी करना सबसे बड़ी चुनौती थी। बारिश के कारण समुद्र की लहरें तेज हो गई थीं, जिससे मुकाबला और कठिन हो गया। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जीत हासिल की। भूमि के अनुसार, इस चैंपियनशिप में भारत को इससे पहले केवल 2013 में कांस्य पदक मिला था। इस बार उन्होंने भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया और अंडर-21 वर्ग में चार पदक जीतकर इतिहास रच दिया। प्रतियोगिता में 29 देशों के खिलाड़ी शामिल थे।
एशियन गेम्स अगला लक्ष्य
अब भूमि की नजरें एशियन गेम्स पर टिकी हैं। उन्होंने कहा कि यह सफलता परिवार के सहयोग और कोच आकाश, अंकित और वेदांत के मार्गदर्शन से संभव हो सकी। भूमि का मानना है कि मुश्किल वक्त में हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि एक रेस पूरी जिंदगी बदल सकती है। भूमि के माता-पिता मेघा और गोविंद अग्रवाल ने बेटी की सफलता पर खुशी जताई, लेकिन इस बात का अफसोस भी व्यक्त किया कि इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद किसी जनप्रतिनिधि ने उन्हें सम्मानित नहीं किया। परिवार का कहना है कि खिलाड़ियों को ऐसे मौकों पर प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
