भोपाल जिले में पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने और दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत 17 दिसंबर से की जा रही है। यह अभियान पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा चलाया जा रहा है, जिसका मकसद किसानों और पशुपालकों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना है। प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निर्देश पर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के मार्गदर्शन में यह अभियान पूरे जिले में संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत 17 दिसंबर से 30 दिसंबर 2025 तक जिलेभर में व्यापक स्तर पर गतिविधियां होंगी, जिनमें पशुपालकों से सीधा संवाद किया जाएगा।
दूसरे चरण में जिले के ऐसे 8950 पशुपालकों को चिन्हित किया गया है, जिनके पास 5 से 9 गाय या भैंस हैं। विभाग की टीमें घर-घर जाकर इन पशुपालकों से मुलाकात करेंगी और उनकी जरूरतों, समस्याओं और संभावनाओं पर चर्चा करेंगी। यह संपर्क 506 गांवों में किया जाएगा।
अधिकारी और मैत्री कार्यकर्ता
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 125 पशु चिकित्सक, पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी और मैत्री कार्यकर्ता तैनात किए गए हैं। ये सभी अधिकारी पशुपालकों को पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान और उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देंगे। अधिकारियों का फोकस केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पशुपालकों को यह भी समझाया जाएगा कि कम लागत में बेहतर देखभाल कैसे की जाए। संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण, सही नस्ल का चयन और वैज्ञानिक प्रजनन पद्धति से दूध उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है, इस पर विशेष जोर रहेगा।
निरंतर मॉनिटरिंग की व्यवस्था
उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. अभिजीत शुक्ला के अनुसार, अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है। पशु प्रजनन कार्यक्रम अधिकारी और नोडल अधिकारी फील्ड में चल रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी और अनुविभागीय अधिकारी समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करेंगे।
दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान का उद्देश्य सिर्फ जागरूकता नहीं, बल्कि पशुपालकों की आय में वास्तविक वृद्धि करना है। विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से जिले में दूध उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालक आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ा सकेंगे।
