ग्वालियर के डबरा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मध्य भारत प्रांत का 58वां प्रांत अधिवेशन 14 से 16 दिसंबर 2025 तक डबरा के जलसा गार्डन में आयोजित हुआ। तीन दिन तक चले इस आयोजन में संगठनात्मक गतिविधियों के साथ विचार, विमर्श और भविष्य की दिशा तय की गई। अधिवेशन के दौरान डबरा को प्रतीकात्मक रूप से ‘गुरु तेगबहादुर नगर’ नाम दिया गया, जबकि मुख्य सभागार को प्रो. यशवंत राव केलकर के नाम से पहचाना गया।
अधिवेशन के अंतिम दिन सत्र 2025-26 के लिए नई प्रांत कार्यकारिणी की घोषणा की गई। इसमें प्रो. धर्मेंद्र राजपूत को प्रांत अध्यक्ष, केतन चतुर्वेदी को प्रांत मंत्री और सत्यादित तोमर, उमा वैष्णव, कविता खटीक, हिमांशु शर्मा और दिव्यांश बक्शी को प्रांत सह मंत्री बनाया गया। नई टीम को संगठन विस्तार और छात्र मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
22 जिलों की मौजूदगी
इस अधिवेशन में मध्यप्रदेश के 22 जिलों से आए 492 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें छात्र, शिक्षक, शिक्षाविद और पूर्णकालिक कार्यकर्ता शामिल रहे। सत्रों के दौरान शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई और कई प्रस्ताव पारित किए गए। 14 दिसंबर को अधिवेशन का उद्घाटन मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति रोहित आर्य ने किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल कक्षा तक सीमित नहीं होते, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने युवा शक्ति, नारी शक्ति और सामाजिक सद्भाव को मजबूत भारत की बुनियाद बताया।
यात्रा पर विशेष सत्र
मध्य क्षेत्र संगठन मंत्री चेतस सुखड़िया ने अधिवेशन को विचार और निरंतरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि 77 वर्षों की यात्रा में अभाविप ने शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, यह अधिवेशन केवल संगठनात्मक बैठक नहीं, बल्कि दिशा तय करने का मंच है। 13 दिसंबर को आयोजित ‘भगवान दास माहौर प्रदर्शनी’ अधिवेशन का विशेष आकर्षण रही। प्रदर्शनी में संगठन के कार्य, जनजातीय नायकों, संविधान, लोकतंत्र और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के योगदान को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे प्रतिनिधियों ने सराहा।
शोभायात्रा में दिखा युवा जोश
15 दिसंबर को डबरा की सड़कों पर अभाविप की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। छात्र-छात्राएं पारंपरिक वेशभूषा, तख्तियां और संगठन ध्वज के साथ शामिल हुए। रास्ते भर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। खुले मंच पर शिक्षा, नारी सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर विचार रखे गए। 16 दिसंबर को राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि अभाविप केवल वर्तमान नहीं, बल्कि अतीत और भविष्य से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि संगठन छात्र आंदोलनों, शिक्षा सुधार और सामाजिक मुद्दों पर निरंतर सक्रिय रहा है और आगे भी रहेगा।
प्रमुख निर्णय
अधिवेशन में कुल 10 सत्र आयोजित हुए, जिनमें दो विशेष भाषण सत्र रहे। जीरो फूड वेस्ट की नीति अपनाई गई और आयोजन को अनुशासित व पर्यावरण के अनुकूल रखा गया। प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने इसे डबरा के लिए ऐतिहासिक आयोजन बताया और कहा कि यहां पारित प्रस्ताव आने वाले समय में संगठन को नई दिशा देंगे। अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान, क्षेत्रीय संगठन मंत्री चेतस सुखड़िया सहित प्रांत स्तर के पदाधिकारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे, जिससे आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की पहचान मिली।
