जबलपुर में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी अब लोगों की दिनचर्या पर असर डालने लगी है। जंगल से निकलकर तेंदुए शहर और ग्रामीण इलाकों तक पहुंच रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि शाम ढलते ही कई गांवों की गलियां और पगडंडियां सुनसान हो जाती हैं। ग्रामीणों में डर है, तो वन विभाग के लिए भी यह बड़ी चुनौती बन गई है। कटंगी क्षेत्र के मुर्रई गांव में दो दिन पहले तेंदुए के हमले ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी। 25 वर्षीय किसान सुकरत सिंह ठाकुर शनिवार सुबह खेत में सिंचाई की तैयारी कर रहे थे। तभी घात लगाए बैठे तेंदुए ने अचानक उन पर हमला कर दिया। झपट्टे में सुकरत गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके हाथ, पैर और सीने में गहरी चोटें आईं।
किसान की चीख-पुकार सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सामूहिक शोर मचाने पर तेंदुआ भाग गया। घायल युवक को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। गांव वालों का कहना है कि इलाके में कई दिनों से तेंदुए की हलचल बनी हुई थी, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
कटंगी, पाटन और सिहोरा से लगे गांवों में तेंदुओं द्वारा मवेशियों को उठाने और लोगों पर हमले की घटनाओं से नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि बकरियां, कुत्ते और अन्य मवेशी तेंदुओं का शिकार बन चुके हैं। मांग की जा रही है कि तेंदुओं को जल्द पकड़ा जाए, ताकि लोग राहत की सांस ले सकें। वन विभाग ने हालात को देखते हुए कटंगी, मझौली और सिहोरा क्षेत्रों में पिंजरे लगाए हैं। डीएफओ ऋषि मिश्र ने माना है कि जबलपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में तेंदुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। उनके अनुसार, जिले में 30 से अधिक तेंदुए खुले जंगल और आसपास के क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं।
इंद्राना और आसपास की स्थिति
इंद्राना गांव के ग्रामीण बताते हैं कि तेंदुआ अक्सर गांव के भीतर नजर आता है। कभी मंदिर की छत पर तो कभी पेड़ों पर बैठे तेंदुए को देखा गया है। चराई के लिए बाहर जाने वाले मवेशियों पर तेंदुआ घात लगाकर हमला करता है और शिकार के बाद जंगल की ओर लौट जाता है। वन विभाग की ओर से मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि सुबह-सुबह या अंधेरा होने के बाद जंगल की ओर न जाएं। बच्चों और बुजुर्गों को अकेले बाहर निकलने से रोका जा रहा है। तेंदुआ दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने को कहा गया है।
जीसीएफ और पाट बाबा क्षेत्र में अलर्ट
गन कैरिज फैक्ट्री और पाट बाबा मंदिर से सटे जंगल में भी तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है। यहां एक परिवार के साथ चार तेंदुए देखे जाने की सूचना है। मंदिर और फैक्ट्री प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए चेतावनी पोस्टर लगाए हैं। वन कर्मी लगातार इलाके की निगरानी कर रहे हैं। राज्य वन अनुसंधान केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में शहरी जबलपुर में 17 तेंदुए दर्ज किए गए थे। दो साल में यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। जीसीएफ, खमरिया, डुमना और ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी ने प्रशासन और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
