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उज्जैन कोर्ट का अहम फैसला: नकली दवा कारोबार पर कड़ा प्रहार, 9 साल पुराने केस में चार दोषियों को जेल

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Published On: 16 December 2025

उज्जैन की अदालत ने मंगलवार को नौ साल पुराने नकली दवा निर्माण और बिक्री के मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस संगठित अपराध में शामिल चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और कुल छह लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। फैसला आते ही दवा कारोबार से जुड़े नियमों और जनस्वास्थ्य को लेकर सख्त संदेश गया है।

यह मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें दवा बनाने, उसकी जांच रिपोर्ट तैयार करने और फिर बाजार में बेचने तक की पूरी श्रृंखला सामने आई। कोर्ट ने माना कि आरोपियों ने मिलकर औषधि प्रसाधन अधिनियम का खुला उल्लंघन किया और आम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया।

2016 में शुरू हुई थी जांच

मीडिया सेल प्रभारी कुलदीप सिंह भदौरिया के अनुसार, 21 सितंबर 2016 को खाद्य एवं औषधि प्रसाधन विभाग, उज्जैन को सिमको आर्गेनिक्स के खिलाफ शिकायत मिली थी। इसके बाद संयुक्त जांच दल का गठन किया गया। औषधि निरीक्षक लोकेश गुप्ता, अल्केश यादव और अजय ठाकुर की टीम ने नागझिरी स्थित सिमको आर्गेनिक्स परिसर में दबिश दी। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी संतोष कुमार धींग के पास ऐलोपैथिक दवाओं के निर्माण का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। तलाशी में 2.6 किलोग्राम प्रिंटेड एल्यूमिनियम लेबल फॉइल, पैकिंग सामग्री और दवा पैक करने की मशीन बरामद की गई। इससे साफ हुआ कि यहां बड़े पैमाने पर नकली दवाओं की पैकिंग की जा रही थी।

इंदौर और बैंगलोर तक फैला था कारोबार

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इन दवाओं का निर्माण इंदौर की मेसर्स सॉफ्ट मेडिकेप्स लिमिटेड के माध्यम से कराया जा रहा था, जिसके लिए आरोपी राजेन्द्र शर्मा जिम्मेदार पाया गया। वहीं, आरोपी प्रवीण शाह ने मेसर्स अल्पा ऐलोपैथिकल लैबोरेटरी के जरिए कानून के खिलाफ फार्म-39 में जांच रिपोर्ट जारी की। इसके बाद बैंगलोर के आरोपी शांतिलाल के माध्यम से करीब 24 लाख रुपये की नकली दवाओं की बिक्री की गई।

लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य, जब्त सामग्री और गवाहों के बयान पेश किए। विशेष लोक अभियोजक उमेश सिंह तोमर ने अंतिम बहस में बताया कि आरोपियों की लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित अपराध साबित होता है। कोर्ट ने इन तर्कों से सहमति जताई।

चारों आरोपियों को सजा

अदालत ने संतोष कुमार धींग (64 वर्ष, निवासी शिवाजी पार्क कॉलोनी, देवास रोड, उज्जैन), राजेन्द्र शर्मा (विजय नगर, इंदौर), प्रवीण शाह (इंदौर) और शांतिलाल (बैंगलोर) को औषधि प्रसाधन अधिनियम की धाराओं 18(सी) और 27(बी)(2) के तहत दोषी ठहराया। सभी को तीन साल का कारावास और छह लाख रुपये का जुर्माना सुनाया गया। प्रकरण में प्रभारी उप-निदेशक (अभियोजन) राजेन्द्र कुमार खाण्डेगर के मार्गदर्शन में प्रभावी पैरवी की गई। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला नकली दवा कारोबार पर लगाम कसने की दिशा में मील का पत्थर है और इससे भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगेगी।

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