जबलपुर हाईकोर्ट ने रीवा जिले के सगरा थाना प्रभारी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त तेवर दिखाए हैं। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस महानिदेशक, आईजी रीवा जोन और रीवा एसपी से जवाब तलब किया है। कोर्ट के इस आदेश से पुलिस महकमे में खलबली मच गई है। याचिका में थाना प्रभारी पर पद का दुरुपयोग करने और फरियादी की सीएम हेल्पलाइन शिकायत जबरन बंद कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में माना कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह कानून और नागरिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
पूरा मामला रीवा जिले की सिरमौर तहसील के ग्राम मझियारी से जुड़ा है। यहां रहने वाले राजेश शुक्ला का अपने चाचा से लंबे समय से जमीन विवाद चल रहा है। इस विवाद में कमिश्नर कोर्ट ने जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट आदेश दिया था, ताकि कोई पक्ष जबरन कब्जा या खेती न कर सके।
फसल कटने का आरोप
राजेश का आरोप है कि उन्होंने अपने खेत में धान की बुवाई की थी, लेकिन सगरा पुलिस की मौजूदगी और कथित सहयोग से उनके चाचा ने फसल कटवा ली। हैरानी की बात यह रही कि कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद पुलिस ने हस्तक्षेप कर फसल कटने से नहीं रोका। उल्टा, पुलिस ने राजेश के खिलाफ ही कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस की इस कथित एकतरफा कार्रवाई से परेशान होकर राजेश ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि पुलिस ने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और धमकाया। जब राजेश ने शिकायत हटाने से इनकार किया, तो पुलिस ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी।
पूरा परिवार थाने ले जाने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने राजेश, उनकी पत्नी और बेटे को जबरन घर से उठाकर थाने ले गई। वहां उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें। आरोप यह भी है कि पुलिस ने खुद ही मोबाइल के जरिए सीएम हेल्पलाइन की शिकायत बंद कर दी। पीड़ित परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उन्हें निलंबित करने की मांग की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि पुलिस ने कानून से ऊपर जाकर काम किया।
CCTV फुटेज तलब
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने सगरा थाने के 24 से 26 अक्टूबर 2025 और 13 से 15 नवंबर 2025 के बीच की सीसीटीवी फुटेज पेश करने को कहा है। अदालत का मानना है कि इन रिकॉर्डिंग से यह स्पष्ट हो सकेगा कि थाने में क्या हुआ। कोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजरें जवाब और सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या रही और कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं।
