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सतना जिला अस्पताल HIV कांड, मीडिया के बाद जागा सिस्टम; जवाबों से ज्यादा सवाल

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Published On: 18 December 2025

MP News : सतना जिला अस्पताल में थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों को HIV संक्रमित खून चढ़ाए जाने का मामला सामने आने के बाद शासन-प्रशासन की सक्रियता अचानक तेज हो गई है। खबर मीडिया में आने के तुरंत बाद राज्य और जिला स्तर पर जांच समितियों के गठन की घोषणा कर दी गई। अब जांच, रिपोर्ट और कार्रवाई की बात की जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि अगर यह मामला सार्वजनिक न होता, तो क्या सिस्टम अपने आप जागता।

यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि सीधे बच्चों की जिंदगी से जुड़ा है। थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को जीवनभर नियमित रूप से खून चढ़ाना पड़ता है। ऐसे में संक्रमित खून चढ़ना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करता है। सवाल उठ रहे हैं कि ब्लड स्क्रीनिंग, स्टोरेज और ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।

क्या रसूखदार होते तो हालात अलग होते?

पीड़ित परिवारों के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि अगर ये बच्चे किसी राजनीतिक या प्रभावशाली परिवार से होते, तो क्या प्रतिक्रिया इतनी देर से आती। क्या तब भी सिर्फ जांच समितियां बनतीं या तत्काल जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती। फिलहाल तो पीड़ित परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा दर्द उन परिवारों का है, जिनके बच्चों की जिंदगी अब अनिश्चितता में है। इलाज के नाम पर अस्पताल पहुंचे परिजन अब सिर्फ भगवान से उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्हें न सिर्फ बीमारी से लड़ना है, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का बोझ भी ढोना पड़ रहा है।

राजनीति तेज

मामला सामने आते ही सियासत भी गर्मा गई है। कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बनाते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला है। दूसरी ओर स्वास्थ्य मंत्री से लेकर पूरा स्वास्थ्य विभाग खुद को बचाने की कोशिश में नजर आ रहा है। बयान, सफाई और जांच की घोषणाओं के बीच जवाबदेही तय होती नहीं दिख रही। HIV संक्रमण कांड को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई, जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन और पीड़ित बच्चों को बेहतर इलाज व मुआवजे की मांग उठाई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही का है।

कार्रवाई या फाइलों में दबेगी जांच

अब सबकी नजर जांच समितियों की रिपोर्ट पर टिकी है। सवाल यही है कि क्या यह जांच वास्तविक दोषियों तक पहुंचेगी या फिर मामला समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा। सतना का यह मामला सिर्फ एक जिले की कहानी नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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