सतना नगर निगम क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता लगातार सवालों के घेरे में है। तमाम शिकवा-शिकायतों और जनप्रतिनिधियों की आपत्तियों के बाद भी ठेकेदारों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही। हैरानी की बात यह है कि महापौर स्वयं कई बार घटिया निर्माण कार्यों पर नाराजगी जता चुके हैं, इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। ताजा मामला शहर की पॉश मानी जाने वाली चाणक्यपुरी कॉलोनी का है। पाठक हॉस्पिटल के सामने मुख्य मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्य में गुणवत्ता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिस सड़क से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं, वहीं नियमों और मानकों को ताक पर रखकर निर्माण किया जा रहा है।
निर्माण स्थल पर सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि कंक्रीट डालते समय वाइब्रेटर मशीन का कहीं उपयोग नहीं किया जा रहा। मानक प्रक्रिया के बजाय देसी तरीकों से काम कराया जा रहा है, जो ग्राम पंचायतों के निर्माण से भी घटिया बताया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि वाइब्रेटर की जगह भैंसों से वाइब्रेशन का काम कराया गया, जिससे निर्माण की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
संबंधों की छाया में ठेकेदारी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार सत्ताधारी दल के एक पार्षद का भाई है। इसी कारण नियमों की अनदेखी खुलेआम हो रही है और किसी भी स्तर पर कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही। यह मामला सामने आने के बाद नगरनिगम के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। शहरवासियों का कहना है कि अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने के बजाय आंख मूंदे बैठे हैं। न तो गुणवत्ता की जांच हो रही है और न ही काम रोकने की कोई कोशिश। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नगरनिगम में ठेकेदारों पर कोई नियंत्रण बचा भी है या फिर सब कुछ मिलीभगत के भरोसे चल रहा है।
जनता भुगत रही नतीजा
घटिया निर्माण का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। खराब सड़कें, टूटता कंक्रीट और बार-बार मरम्मत के नाम पर होने वाला खर्च अंततः जनता की जेब से ही जाता है। लोग यह भी आशंका जता रहे हैं कि कुछ महीनों में ही यह सड़क उखड़ जाएगी और फिर वही पुरानी समस्या सामने आएगी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हालात कुछ ऐसे हो गए हैं। अधिकारी मौन हैं, ठेकेदार बेफिक्र हैं और जनता परेशान। अब मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में शहर को इस तरह की लापरवाही का खामियाजा न भुगतना पड़े।
