सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से जुड़े गंभीर मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद HIV पॉजिटिव पाए जाने के खुलासे के बाद जांच के लिए केंद्र सरकार की टीम सतना पहुंच चुकी है, लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन को इसकी स्पष्ट जानकारी तक नहीं है।
भारत सरकार के सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के दो वरिष्ठ वैज्ञानिक बुधवार दोपहर सीधे रेलवे स्टेशन से जिला अस्पताल पहुंचे। बिना किसी औपचारिक स्वागत या स्थानीय समन्वय के दोनों अधिकारियों ने ब्लड बैंक की जांच शुरू की और देर रात तक रिकॉर्ड, उपकरणों और प्रक्रियाओं की बारीकी से पड़ताल की। गुरुवार को भी टीम ने दूसरे दिन की जांच जारी रखी।
CMHO को नहीं थी सही जानकारी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को यह स्पष्ट ही नहीं था कि जांच कौन कर रहा है। बुधवार देर शाम मीडिया से बातचीत में CMHO ने कहा कि जिला अस्पताल में सात सदस्यीय जांच टीम काम कर रही है, जिसे भोपाल से हेल्थ कमिश्नर ने भेजा है। जबकि वास्तविकता यह है कि राज्य की वह सात सदस्यीय टीम अब तक सतना पहुंची ही नहीं थी।
राज्य बनाम केंद्र की तस्वीर
एक ओर केंद्र सरकार की टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई, वहीं राज्य स्तर पर गठित टीम की मौजूदगी सिर्फ कागजों तक सीमित दिखी। प्रदेश के हेल्थ कमिश्नर द्वारा गठित सात सदस्यीय टीम के सतना नहीं पहुंच पाने से प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल उठने लगे हैं। इतने संवेदनशील और मानवीय पहलू से जुड़े मामले में जिला स्तर और राज्य स्तर के अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी साफ नजर आई। सवाल उठ रहे हैं कि जब CMHO जैसे जिम्मेदार अधिकारी को ही यह जानकारी नहीं कि अस्पताल में कौन जांच कर रहा है, तो निगरानी और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी।
पीड़ित परिवारों की चिंता
इस प्रशासनिक भ्रम का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके बच्चे HIV से संक्रमित हुए हैं। जांच की प्रक्रिया और जिम्मेदार एजेंसियों को लेकर फैली असमंजस की स्थिति ने पीड़ितों की चिंता और भरोसे की कमी को और गहरा कर दिया है। मामला सामने आने के बाद बयानबाजी और कमेटियों के गठन की बात जरूर हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर तालमेल की कमी ने राज्य सरकार की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारी तय होती है या यह मामला भी फाइलों में उलझकर रह जाता है।
