मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) भोपाल के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित 24 सप्ताह का AICTE-QIP-PG प्रमाणपत्र कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। “हाइड्रोमौसमीय चरम घटनाएँ एवं जलवायु आपदाएँ: डेटा-आधारित दृष्टिकोण, प्रभाव एवं सुदृढ़ रणनीतियाँ” विषय पर केंद्रित यह कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में संचालित किया गया, जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का उपयोग किया गया।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (QIP) योजना के तहत आयोजित इस छह माह के कोर्स में देश के विभिन्न AICTE-स्वीकृत संस्थानों से 33 संकाय सदस्यों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में सिविल इंजीनियरिंग के साथ-साथ मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख विषयों के शिक्षक शामिल रहे।
जलवायु चुनौतियों पर फोकस
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़ी हाइड्रोमौसमीय चरम घटनाओं को वैज्ञानिक और व्यावहारिक नजरिए से समझाना था। पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया कि सैद्धांतिक अवधारणाओं के साथ-साथ डेटा-आधारित विश्लेषण, जोखिम आकलन और आपदा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जा सके। प्रतिभागियों को विभिन्न आधुनिक टूल्स, मॉडलिंग तकनीकों और डेटा विश्लेषण विधियों से परिचित कराया गया। इसका मकसद शिक्षकों को न केवल अकादमिक रूप से समृद्ध करना था, बल्कि उन्हें ऐसे संसाधन देना भी था, जिनके जरिए वे भविष्य में जलवायु आपदाओं के पूर्वानुमान, प्रभाव आकलन और शमन रणनीतियों पर बेहतर काम कर सकें।
विशेषज्ञों के विचार
कार्यक्रम के वैलेडिक्टरी सत्र की अध्यक्षता प्रो. विमलेश कुमार सोनी ने की। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक संकाय विकास कार्यक्रम तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. विकास पूनिया ने जलवायु-जनित जोखिमों से निपटने के लिए अंतःविषय और प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण को समय की आवश्यकता बताया। इस अवसर पर सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. प्रियमित्र मूनोथ भी उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इस पहल के जरिए MANIT भोपाल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संस्थान तकनीकी शिक्षा में क्षमता निर्माण, नवाचार और सामाजिक सरोकारों के प्रति गंभीर और प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम से जुड़े संकाय सदस्य अपने-अपने संस्थानों में इस ज्ञान को आगे बढ़ाकर सुरक्षित, सुदृढ़ और सतत समाज के निर्माण में योगदान देंगे।
