सतना शहर में विकास की रफ्तार तेज बताई जा रही है। कहीं सड़क चौड़ीकरण, कहीं सीवर लाइन, तो कहीं नई सड़क निर्माण के नाम पर खुदाई चल रही है। कागजों में यह सब तरक्की की तस्वीर पेश करता है, लेकिन जमीनी हकीकत आम लोगों के लिए परेशानी बनती जा रही है। सड़कों को खोदने के बाद उन्हें ठीक से नहीं बनाया जा रहा, जिससे नागरिकों को रोजाना जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है।
ऐसी ही बदहाल तस्वीर धवारी से सिविल लाइन की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर देखने को मिल रही है। शारदा अस्पताल के सामने सड़क पर बना एक बड़ा गड्ढा राहगीरों के लिए सिरदर्द बन चुका है। दिन हो या रात, दोपहिया और पैदल चलने वाले लोग यहां आए दिन फिसलकर गिर रहे हैं। हालत यह है कि कई घायल सीधे सामने स्थित अस्पताल तक पहुंच रहे हैं।
राज्य मंत्री का निवास
विडंबना यह है कि जिस गड्ढे की वजह से लोग चोटिल हो रहे हैं, वही गड्ढा शारदा अस्पताल के ठीक सामने मौजूद है। अस्पताल में इलाज तो मिल रहा है, लेकिन हादसों की जड़ बनी सड़क पर किसी की नजर नहीं पड़ रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते गड्ढा भर दिया जाए तो कई दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शारदा अस्पताल के बगल वाली गली में स्वयं एक राज्य मंत्री का निवास है। मंत्री दिन में दो से चार बार इसी मार्ग से निकलती हैं। यही नहीं, कलेक्टर और एसपी भी रोजाना इसी सड़क से गुजरते हैं। बावजूद इसके, महीनों से सड़क का यह गड्ढा जस का तस बना हुआ है।
लोगों में नाराजगी
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर नगर निगम और लोक निर्माण विभाग को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं। नतीजा यह है कि जनता की परेशानी जस की तस बनी हुई है। लोगों में नाराजगी है कि जब वीआईपी आवाजाही वाले रास्ते की यह हालत है, तो शहर की बाकी सड़कों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। नागरिकों का सवाल है कि क्या विकास सिर्फ योजनाओं और उद्घाटनों तक सीमित रह गया है? आम लोगों को सुरक्षित सड़क और राहत कब मिलेगी?
गड्ढा एक बड़ा सवाल
शहर के विकास के दावों के बीच यह छोटा सा गड्ढा प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान देंगे और कम से कम इस गड्ढे को भरवाकर जनता को राहत देंगे।
