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झाबुआ के मदरानी गांव में धर्मांतरण विवाद, मारपीट के बाद भड़का आदिवासी समाज

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Published On: 20 December 2025

झाबुआ जिले के काकनवानी थाना क्षेत्र अंतर्गत मदरानी गांव में अवैध धर्मांतरण और एक आदिवासी युवक से मारपीट का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। शुक्रवार देर रात पुलिस ने दो ईसाई पास्टर सहित कुल सात नामजद लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई सर्व आदिवासी समाज के जोरदार विरोध प्रदर्शन के बाद की गई।

पुलिस के अनुसार, मदरानी गांव निवासी आदिवासी युवक गेंदाल डामोर शुक्रवार को अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में दो ईसाई पास्टर और उनके साथ मौजूद कुछ स्थानीय लोगों ने उसे रोक लिया। आरोप है कि इन लोगों ने युवक पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया और उसे तरह-तरह के प्रलोभन भी दिए।

दी धमकी

पीड़ित युवक का कहना है कि जब उसने धर्म परिवर्तन से साफ इनकार किया तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद उसके साथ मारपीट की गई और पत्थर फेंके गए, जिससे उसे चोटें आईं। युवक ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने उसके घर की ओर भी पत्थर फेंके, जिससे गांव में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। थाना काकनवानी पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर दो ईसाई पास्टर और पांच अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आदिवासी समाज का आक्रोश

घटना के बाद सर्व आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में एकजुट हो गए। देर रात तक गांव और थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन चलता रहा। समाज के लोगों ने इसे आदिवासी अस्मिता और परंपराओं पर हमला बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने थाना काकनवानी और मदरानी चौकी पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी अंचलों में लालच, दबाव और धमकी के जरिए अवैध धर्मांतरण के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं, जिन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए।

संस्कृति और पहचान का सवाल

समाज के नेताओं का कहना है कि भोले-भाले आदिवासियों को निशाना बनाकर उनकी संस्कृति, परंपरा और पहचान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा सामने आईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस कार्रवाई के बाद गांव में शांति है, लेकिन आदिवासी समाज की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों की मांग है कि मामले में निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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