उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में एक बार फिर श्रद्धा और आस्था का अनोखा उदाहरण देखने को मिला। जयपुर के रहने वाले एक भक्त ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद भगवान महाकाल को 111 किलोग्राम वजनी पीतल के नंदी भेंट किए। यह दान न केवल वजन और आकार के कारण खास है, बल्कि इसके पीछे जुड़ी भावनाएं भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं।
जयपुर निवासी विपिन बंसल ने यह दान भगवान महाकाल के चरणों में अर्पित किया। बताया गया कि उन्होंने यह भेंट पुजारी राजेश शर्मा की प्रेरणा से की। विपिन बंसल के अनुसार, लंबे समय से चली आ रही एक मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने भगवान का आभार जताने के लिए यह निर्णय लिया। पीतल से निर्मित ये नंदी खास तौर पर तैयार कराए गए, जिनका कुल वजन 111 किलोग्राम है।
मंदिर समिति ने किया सम्मान
दान स्वीकार किए जाने के बाद मंदिर समिति की ओर से दानदाता का सम्मान भी किया गया। समिति ने विपिन बंसल को भगवान महाकाल का प्रसाद और दुपट्टा भेंट कर आभार जताया। इस अवसर पर मंदिर प्रशासन के अधिकारी और पुजारी भी मौजूद रहे। समिति का कहना है कि इस तरह के दान श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दर्शाते हैं। मंदिर समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि दान में प्राप्त पीतल के नंदी को मंदिर परिसर में उचित और सम्मानजनक स्थान पर स्थापित किया जाएगा। स्थापना से पहले विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की जाएगी, ताकि यह भेंट श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन सके।
दान की परंपरा
महाकालेश्वर मंदिर में मनोकामना पूरी होने पर दान देने की परंपरा काफी पुरानी है। यहां आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार सोने-चांदी के आभूषण, नकद राशि, वस्त्र या अन्य सामग्री अर्पित करते हैं। कई भक्त विशेष प्रतीकात्मक वस्तुएं भी भेंट करते हैं, जो उनकी आस्था और विश्वास को दर्शाती हैं।
