राजधानी भोपाल में क्रिसमस की तैयारियों के बीच मिशनरी और निजी स्कूलों में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने स्कूल प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा है कि बच्चों को जबरन सांता क्लॉज न बनाया जाए। संगठनों का कहना है कि यदि किसी छात्र को इस तरह की गतिविधि में शामिल करना है, तो पहले अभिभावकों की स्पष्ट अनुमति ली जाए।
हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर सोलंकी ने सोमवार को कहा कि कुछ स्कूलों में बच्चों को बिना पूछे सांता क्लॉज की पोशाक पहनने और क्रिसमस कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए कहा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बिना अभिभावकों की सहमति के ऐसा किया गया, तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। संगठन इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है।
सरकार से आदेश की मांग
संस्कृति बचाओ मंच ने इस मामले में राज्य सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की है। मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार को स्पष्ट आदेश जारी करना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सनातन परंपरा को मानने वाले बच्चों को किसी भी धार्मिक गतिविधि के लिए मजबूर न किया जाए। उनका तर्क है कि स्कूल शिक्षा का केंद्र हैं, न कि धार्मिक दबाव का माध्यम।
संगठनों ने अभिभावकों से भी आगे आने की अपील की है। कहा गया है कि यदि किसी स्कूल में बच्चों पर सांता क्लॉज बनने या क्रिसमस से जुड़ी सामग्री लाने का दबाव बनाया जा रहा है, तो माता-पिता इसकी शिकायत सीधे हिंदू उत्सव समिति या संस्कृति बचाओ मंच में दर्ज कराएं। शिकायत मिलने पर संगठन संबंधित संस्थान के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगा।
विहिप और बजरंग दल आमने-सामने
इस मुद्दे पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने भी सख्त रुख अपनाया है। विहिप के प्रांत सह मंत्री जितेंद्र चौहान ने कहा कि मध्य भारत के स्कूलों को पत्र लिखकर आग्रह किया जाएगा कि सनातन परंपरा को मानने वाले छात्रों से सांता क्लॉज बनने या क्रिसमस ट्री लाने को न कहा जाए। उन्होंने इसे हिंदू संस्कृति पर हमला करार दिया। विहिप नेताओं का कहना है कि भारत संतों और महापुरुषों की भूमि है। स्कूलों में बच्चों को राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, गुरु गोविंद सिंह, स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों की भूमिका में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि सांता क्लॉज के रूप में। संगठनों का दावा है कि इससे न केवल सांस्कृतिक पहचान बनी रहेगी, बल्कि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा।
त्योहारों के बीच बढ़ी सियासत
क्रिसमस से पहले उठे इस मुद्दे ने शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक बहस को तेज कर दिया है। जहां एक ओर स्कूल अपने वार्षिक उत्सव और त्योहारों की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर संगठनों की चेतावनी ने प्रशासन और शिक्षा संस्थानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और स्कूल प्रबंधन इस पर क्या रुख अपनाते हैं।
