सिहोरा को जिला बनाने की मांग कोई नई नहीं है। पिछले करीब 30 साल से यह मुद्दा अलग-अलग मंचों से उठता रहा है, लेकिन अब यह आंदोलन एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति और स्थानीय नागरिक 3 दिसंबर 2025 से लगातार आमरण सत्याग्रह पर बैठे हैं। बीते 15 दिनों से जारी इस आंदोलन ने प्रदेश स्तर पर ध्यान खींचा है।
आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया है। इसी क्रम में आज यानी 22 दिसंबर को करीब 50 आंदोलनकारी दोपहर 2 बजे निजी वाहनों से भोपाल के लिए रवाना होंगे। 23 दिसंबर को मुख्यमंत्री से उनकी सीधी बातचीत प्रस्तावित है। इस बैठक में सिहोरा को जिला बनाए जाने की मांग प्रमुख रूप से रखी जाएगी।
तबीयत ने बढ़ाया दबाव
आंदोलन के दौरान 11 दिसंबर को आमरण अनशन में बैठे आरएसएस के पूर्व प्रचारक प्रमोद साहू की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। अन्न-जल त्याग के चलते उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना के बाद प्रशासन और सरकार की सक्रियता बढ़ी। 13 दिसंबर को क्षेत्रीय विधायक संतोष वरकड़े के माध्यम से डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने प्रमोद साहू से फोन पर बात की और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।
अन्न त्याग अब भी जारी
डिप्टी सीएम के अनुरोध पर प्रमोद साहू ने जल तो ग्रहण कर लिया, लेकिन अन्न त्याग अब भी जारी रखा। उनका साफ कहना था कि जब तक सिहोरा जिला नहीं बनता, वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। इस फैसले ने आंदोलन को और मजबूत किया और जनसमर्थन भी बढ़ा। डिप्टी सीएम ने 16 दिसंबर को मुख्यमंत्री से टेबल टॉक का भरोसा दिलाया था, लेकिन उस दिन बैठक नहीं हो सकी। बाद में जानकारी सामने आई कि पारिवारिक शोक के कारण यह मुलाकात टल गई थी। अब आगामी मंगलवार को वार्ता तय होने से आंदोलनकारियों में नई उम्मीद जगी है।
आंदोलन समिति ने रखी अपनी बात
लक्ष्य जिला सिहोरा आंदोलन समिति के सदस्य राकेश पाठक ने कहा कि आसपास के गांवों का समर्थन लेकर आंदोलन को मजबूती दी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री के सामने सिहोरा को जिला बनाने की ठोस जरूरतें रखी जाएंगी। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश पांडे का कहना है कि मुख्यमंत्री ने पहले भी सिहोरा को जिला बनाने को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे। अब भोपाल जाकर बातचीत से उन्हें ठोस निर्णय की उम्मीद है।
