ग्वालियर में रामकृष्ण आश्रम मिशन से जुड़े बहुचर्चित साइबर फ्रॉड मामले में सोमवार को नया मोड़ सामने आया। क्राइम ब्रांच ने विशेष न्यायालय में अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि तत्कालीन सचिव सुप्रदिप्तानंद को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 17 मार्च से 11 अप्रैल के बीच संस्था के खातों से 2.53 करोड़ रुपए की ठगी की गई।
जांच में सामने आया कि ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस का हवाला देकर सुप्रदिप्तानंद को मानसिक दबाव में रखा। आरोपियों ने कहा कि उनके आधार और मोबाइल नंबर से जुड़े अकाउंट का इस्तेमाल अवैध लेन-देन में हुआ है। इसी बहाने आश्रम के तीन बैंक खातों से मोटी रकम ट्रांसफर करवा ली गई।
ग्वालियर: सैकड़ों तक पैसा
क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट के मुताबिक आश्रम के तीन खातों से सबसे पहले 2.53 करोड़ रुपए 10 अलग-अलग बैंक खातों में भेजे गए। इसके बाद इन दस खातों से रकम को 532 अन्य खातों में फैला दिया गया। एजेंटों के जरिए एटीएम, चेक और कैश विंडो से पैसे निकाले गए। तेज कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच ने 178 बैंक खातों में भेजे गए करीब 9.7 लाख रुपए फ्रीज कराए। हालांकि बड़ी रकम अब भी ठगों के नेटवर्क में घूम चुकी है। अब तक इस केस में 22 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें बैंक का असिस्टेंट मैनेजर और कैशियर जैसे कर्मचारी भी शामिल बताए गए हैं।
हरदा से गिरफ्तारी
हाल ही में हरदा जिले से अखिलेश बिशनाई नाम के आरोपी को पकड़ा गया। उसने अपनी मां के नाम से खाता खुलवाया था, जिसमें उसका ही मोबाइल नंबर दर्ज था। इस खाते में करीब पांच लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। पुलिस अब एक बड़े खाते के होल्डर मोहम्मद नदीम की तलाश में जुटी है। पुलिस ने मामले में चालान पेश कर दिया है, लेकिन ठगी की पूरी रकम जब्त न होने पर विशेष न्यायालय ने नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट के साथ क्राइम ब्रांच के डीएसपी को तलब किया था। डीएसपी ने अदालत में जांच की प्रगति की जानकारी दी।
फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा खेल
मामले की शुरुआत 17 मार्च को एक फोन कॉल से हुई थी। कॉल करने वाले ने खुद को नासिक पुलिस का अफसर बताया और मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम होने की बात कही। फर्जी दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और जांच का डर दिखाकर आश्रम के फंड से करोड़ों रुपए निकलवा लिए गए। ठगी का अहसास होने पर मामला क्राइम ब्रांच तक पहुंचा, जहां अब इसकी परत-दर-परत जांच जारी है।
