इंदौर भी उन चुनिंदा शहरों में शामिल है, जहां यह आयोजन विशेष रूप से चर्चा में है। इंदौर में सांसद खेल महोत्सव का आयोजन वैष्णव महाविद्यालय परिसर में किया गया है। यहां से खिलाड़ी प्रधानमंत्री से सीधे बातचीत करेंगे। आयोजन के समन्वयक कपिल जैन ने बताया कि सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए खिलाड़ियों से संवाद करेंगे। इसके लिए विशेष तकनीकी व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि संवाद दोतरफा हो सके। देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में सांसद खेल महोत्सव एक बड़ा मंच बनकर उभरा है। इसी कड़ी में 25 दिसंबर को देशभर में आयोजित हो रहे खेल महोत्सवों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे जुड़ने जा रहे हैं। इस संवाद को लेकर खिलाड़ियों में खासा उत्साह है।
पीएमओ की ओर से इंदौर को कुछ अन्य शहरों के साथ स्पेशल कैटेगरी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि यहां के खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री सीधे सवाल-जवाब भी करेंगे। आयोजन स्थल पर टू-वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे खिलाड़ी बिना किसी बाधा के अपनी बात रख सकें।
खेल फिटनेस के प्रति जागरूक करना
सांसद शंकर लालवानी के नेतृत्व में हो रहे इस आयोजन का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताएं कराना नहीं है… इसका मकसद खेल को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना, युवाओं को फिटनेस के प्रति जागरूक करना और गांव-शहर में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना है। यही वजह है कि इस बार महोत्सव में विविध वर्गों की भागीदारी देखने को मिल रही है। इस वर्ष सांसद खेल महोत्सव-2025 में करीब 1000 से अधिक दिव्यांग खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री का इन खिलाड़ियों से सीधा संवाद उनके लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित होगा। यह मंच न सिर्फ उन्हें सम्मान देगा, बल्कि भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देगा।
संस्कृति की झलक
कपिल जैन के अनुसार, इस साल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ महिला, युवा और दिव्यांग खिलाड़ियों की भागीदारी यह दिखाती है कि इंदौर में खेल संस्कृति तेजी से मजबूत हो रही है। खेल अब सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं, बल्कि समाज का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि प्रधानमंत्री की सोच और मार्गदर्शन के कारण ही इंदौर जैसे शहरों में इतने बड़े खेल आयोजन संभव हो पाए हैं। फिट इंडिया अभियान और खेलों को जन-जन तक पहुंचाने की पहल ने युवाओं में नई ऊर्जा भरी है। सांसद खेल महोत्सव इसी सोच का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है।
