,

अयोध्या बायपास पर पेड़ों की सांस थमी, सड़क पर उतरा भोपाल

Author Picture
Published On: 25 December 2025

भोपाल के अयोध्या बायपास को दस लेन में बदलने की तैयारी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। 7,871 पेड़ों की कटाई पर एनजीटी ने रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 8 जनवरी तय की है। इस आदेश के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल है, वहीं पर्यावरण से जुड़े लोग इसे बड़ी राहत मान रहे हैं। पेड़ों को बचाने के लिए अब आंदोलन तेज होने जा रहा है। गुरुवार दोपहर 2 बजे बड़ी संख्या में पर्यावरणप्रेमी काकड़ा फार्म हाउस के पास अयोध्या बायपास पर जुटेंगे। प्रदर्शन का तरीका भी अलग होगा लोग पेड़ों से लिपटकर उन्हें कटने से बचाने की अपील करेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत संदेश देने वाला आंदोलन होगा।

पर्यावरणविदों का तर्क सीधा है। जिन पेड़ों को काटा जाना प्रस्तावित है, उनकी उम्र 40 से 80 साल, कहीं-कहीं इससे भी ज्यादा है। एनएचएआई भले ही 81 हजार पौधे लगाने का दावा कर रहा हो, लेकिन ये पौधे पेड़ बनने में दशकों ले लेंगे। इस बीच शहर गर्मी, प्रदूषण और कार्बन के बोझ से जूझेगा।

10 लेन की जरूरत पर सवाल

इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि मौजूदा ट्रैफिक को देखते हुए 10 लेन सड़क की जरूरत ही नहीं है। अभी चार लेन मौजूद हैं, जिन्हें अधिकतम छह लेन तक बढ़ाया जा सकता है। इससे यातायात भी सुधरेगा और हरियाली भी बचेगी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी को शहर के भीतर सड़क चौड़ी करने का अधिकार क्यों दिया जा रहा है। आसाराम चौराहे से रत्नागिरि तिराहे तक करीब 16 किलोमीटर लंबे हिस्से को दस लेन बनाने की योजना है। तीन दिन पहले गठित एक कमेटी के आदेश के बाद नगर निगम के जरिए पेड़ काटने की कार्रवाई शुरू हुई थी। इसी के खिलाफ एनजीटी में याचिका दाखिल की गई।

एनजीटी का सख्त रुख

इस मामले की सुनवाई जस्टिस पुष्पा सत्यनारायणा और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कहा कि जब तक सीईसी कमेटी की बैठक के मिनट्स पेश नहीं होते, तब तक पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। हालांकि सड़क निर्माण से जुड़े अन्य काम जारी रखे जा सकते हैं, बशर्ते एक भी पेड़ न कटे। पेड़ कटाई को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। सोमवार को शुरू हुई कटाई का कांग्रेस ने विरोध किया। अगले दो दिन पार्टी नेताओं ने मास्क पहनकर प्रदर्शन किया और हरियाली बचाने की मांग उठाई। कांग्रेस का कहना है कि विकास के नाम पर प्रकृति की बलि स्वीकार नहीं की जा सकती।

Related News
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp