Ujjain News: महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर की पहचान सिर्फ एक ज्योतिर्लिंग तक सीमित नहीं रह गई है। अब यह आस्था, भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा का बड़ा केंद्र बन चुका है। देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में उज्जैन पहुंच रहे हैं। इसका असर साफ तौर पर मंदिर में उमड़ती भीड़ और लगातार बढ़ते दान में देखा जा रहा है।
महाकाल लोक बनने से पहले प्रतिदिन करीब 40 से 50 हजार श्रद्धालु मंदिर दर्शन के लिए आते थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। वर्तमान में रोजाना डेढ़ से दो लाख भक्त भगवान महाकाल के दर्शन कर रहे हैं। खास पर्व, सोमवार और श्रावण जैसे महीनों में यह संख्या और भी ज्यादा हो जाती है।
5.50 करोड़ भक्तों की मौजूदगी
आंकड़े बताते हैं कि बीते 11 महीनों में करीब 5 करोड़ 50 लाख श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंचे हैं। इतनी बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों की मौजूदगी ने उज्जैन को देश के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल कर दिया है। होटल, धर्मशालाएं और स्थानीय बाजार भी इस बढ़ती आस्था के साक्षी बन रहे हैं। श्रद्धालु अब केवल दर्शन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दान में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। बीते 11 महीनों में भक्तों ने करीब 13 करोड़ रुपए मूल्य का सोना-चांदी महाकाल मंदिर को अर्पित किया है। इसमें सोने के आभूषण, चांदी की वस्तुएं और विशेष भेंट शामिल हैं।
बरसा करोड़ों का योगदान
मंदिर परिसर में लगी विभिन्न दान पेटियों से इस साल 1 जनवरी से 15 दिसंबर के बीच 43 करोड़ 43 लाख रुपए नकद दान के रूप में प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि श्रद्धालुओं की आस्था अब पहले से कहीं ज्यादा गहरी और व्यापक हो चुकी है। भक्तों की सुविधा के लिए शुरू की गई शीघ्र दर्शन व्यवस्था भी मंदिर समिति के लिए आय का बड़ा स्रोत बनकर उभरी है। इसी अवधि में शीघ्र दर्शन से करीब 64 करोड़ 50 लाख रुपए की आय हुई है। इससे व्यवस्थाओं को और बेहतर करने में मदद मिल रही है।
वर्ष 2024 में भेंट पेटी और शीघ्र दर्शन से मंदिर को कुल 92 करोड़ रुपए की आय हुई थी। वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा करीब 15 करोड़ रुपए बढ़ गया है। यह बढ़ोतरी साफ संकेत देती है कि महाकाल लोक ने उज्जैन को आस्था की नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।
