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रतलाम के जावरा में किसानों के खातों में 810 करोड़, मंच पर सम्मान; बाहर सियासी खींचतान

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Published On: 28 December 2025

रतलाम जिले के जावरा में रविवार को सरकारी कार्यक्रम के मंच से बड़ा संदेश गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय सोयाबीन भावांतर योजना के तहत सिंगल क्लिक से 3.77 लाख किसानों के खातों में 810 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। शासकीय भगत सिंह महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम को सरकार ने किसान हितैषी पहल के रूप में प्रस्तुत किया, जहां लाभार्थियों की लंबी सूची ने आयोजन को खास बना दिया।

मुख्यमंत्री के जावरा पहुंचते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह साफ नजर आया। कॉलेज परिसर से लेकर सड़कों तक स्वागत की तैयारियां दिखीं। फूल-मालाओं और नारों के बीच सीएम मंच तक पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान सरकार की योजनाओं और किसानों के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया।

आदमकद प्रतिमा का अनावरण

कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री सुजापुर पहुंचे, जहां पूर्व सांसद स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण पांडेय की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह प्रतिमा जावरा विधायक राजेंद्र पांडेय और उनके परिवार द्वारा विकसित स्मृति कुंज में स्थापित की गई है। आयोजन में क्षेत्र के राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधियों की बड़ी मौजूदगी रही। प्रतिमा अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. पांडेय गांव की माटी से निकलकर आदर्शवादी राजनीति के उज्ज्वल प्रतीक बने। उन्होंने जावरा-मंदसौर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश की राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नेताओं के विचार आज भी मार्गदर्शन देते हैं।

वरिष्ठ नेताओं का हुआ उल्लेख

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सुंदरलाल पटवा, कुशाभाऊ ठाकरे, वीरेंद्र कुमार सखलेचा और डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडेय को याद किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने राजनीति को सेवा का माध्यम माना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक दिशा तय की। मंच से उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेने की अपील की गई।

कांग्रेस का विरोध

इधर, मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कांग्रेस नेताओं ने काले झंडे दिखाने और ज्ञापन देने की तैयारी की थी। लेकिन जिला और पुलिस प्रशासन ने उन्हें नजरबंद कर दिया। रतलाम में हेलीपेड जाने से भी कांग्रेस नेताओं को रोका गया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष शांतिलाल वर्मा के कार्यालय पर प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और ज्ञापन लेने की पेशकश की, जिसे कांग्रेस नेताओं ने ठुकरा दिया। शांतिलाल वर्मा ने आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्वक मुख्यमंत्री से मिलकर जनता की समस्याएं रखना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधियों को रोका जाएगा तो जनता की बात आखिर पहुंचेगी कहां यह सवाल अब सड़कों से निकलकर सियासत के केंद्र में आ गया है।

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