मनरेगा की जगह विकसित भारत-रोजगार और आजीविका की गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को लेकर पंजाब से लेकर संसद तक सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इसी बीच भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि रोजगार योजनाओं का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है और मनरेगा भी इससे अलग नहीं रही।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मनरेगा जब शुरू हुई थी, तब उससे उम्मीदें थीं, लेकिन धीरे-धीरे यह योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक गई। उनके मुताबिक मजदूरों की जगह मशीनों से काम होने लगा और भारी बजट खर्च होने के बाद भी गांवों में ठोस बदलाव नजर नहीं आया। उन्होंने साफ कहा कि मनरेगा भ्रष्टाचार का पर्याय बनती चली गई, इसलिए बदलाव जरूरी हो गया था।
जी राम जी में गांव की भूमिका
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नए कानून की तैयारी पर पिछले एक साल से मंथन चल रहा था। विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ‘जी राम जी’ योजना लाई गई है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव यह है कि गांवों का विकास प्लान अब ग्राम पंचायत खुद बनाएगी। इससे योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर असर दिखा सकेंगी। पंजाब विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने पर शिवराज सिंह चौहान ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद से पारित कानून के खिलाफ इस तरह का कदम संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। उनका आरोप था कि पंजाब सरकार और उसके सहयोगी दल अंध विरोध की राजनीति कर रहे हैं, जबकि खुद उनके दामन पर भ्रष्टाचार के दाग लगे हैं।
संसद में हंगामे पर जवाब
संसद में विपक्ष के हंगामे को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शोर-शराबे के बावजूद उन्होंने मजबूती से अपना पक्ष रखा। उनके मुताबिक विपक्ष को विकास से जुड़ी बातों पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए, न कि सिर्फ विरोध के लिए विरोध। ग्वालियर में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव की तारीफ किए जाने के सवाल पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मोहन यादव उनसे भी अधिक ऊर्जा और तेज गति से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विकास की राह पर बढ़ रहा है और मुख्यमंत्री को उनकी शुभकामनाएं हैं।
राहुल गांधी पर पलटवार
योजना की जानकारी को लेकर राहुल गांधी के बयान पर शिवराज सिंह चौहान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कल्पनाओं की दुनिया में रहते हैं और जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं। बिना कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की प्रक्रिया के कोई योजना लागू नहीं हो सकती, यह बुनियादी बात है। पश्चिम बंगाल में महाकाल मंदिर के ऐलान पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चुनाव आते ही कुछ नेताओं को मंदिर और पूजा-पाठ याद आने लगते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आस्था की बात करने वाले लोग धार्मिक संस्थाओं पर हमलों के वक्त खामोश रहते हैं।
