नव वर्ष के स्वागत को लेकर उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में इस बार कुछ अलग और भव्य होने जा रहा है। मंदिर के द्वार, शिखर और महाकाल लोक को 11 हजार डमरू और 5 लाख से अधिक रुद्राक्ष से सजाया जाएगा। यह अनोखी सजावट श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आकर्षण का नया केंद्र बनेगी। इस भव्य श्रृंगार के लिए गुजरात के बड़ोदरा से 108 लोगों की विशेष टीम उज्जैन पहुंची है। यह टीम डमरू वाला ग्रुप के नाम से जानी जाती है। टीम के सदस्य पूरी तरह पारंपरिक अंदाज में महाकाल मंदिर को सजाने में जुटे हुए हैं और 31 जनवरी की रात तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।
सजावट की शुरुआत नंदी द्वार से की जा रही है। इसके बाद महाकाल लोक के स्तम्भों, मंदिर के शिखर, नीलकंठ द्वार, नंदी हाल और चांदी गेट को सजाया जाएगा। रुद्राक्ष, डमरू, पन्नी बेल, झूमर और सीएनसी कटिंग के माध्यम से हर कोने को खास रूप दिया जा रहा है।
2 दिन में पूरा होगा दिव्य कार्य
टीम के सदस्य नरेंद्र शाह ने बताया कि यह पूरा काम बेहद सटीक योजना के तहत किया जा रहा है और दो दिनों के भीतर सजावट को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर डमरू और हर रुद्राक्ष को इस तरह सजाया जा रहा है, जिससे महाकाल मंदिर की भव्यता और अधिक निखर सके। नरेंद्र शाह ने बताया कि इससे पहले उनकी टीम केदारनाथ मंदिर में भी इसी तरह की सजावट कर चुकी है। महाकाल मंदिर में सेवा का अवसर मिलना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है। टीम के सभी सदस्य इसे केवल काम नहीं, बल्कि बाबा महाकाल की सेवा मानकर कर रहे हैं।
बाइकों पर सवार होकर पहुंचे श्रद्धालु
डमरू वाला ग्रुप की खास पहचान यह है कि इसके सदस्य बाइकर्स हैं। इसी वजह से पूरी टीम बड़ोदरा से उज्जैन तक बाइक से यात्रा करके पहुंची है। यह यात्रा उनके लिए सिर्फ सफर नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा अनुभव रही। नव वर्ष पर महाकाल मंदिर की सजावट का पूरा खर्च डमरू वाला ग्रुप द्वारा स्वयं वहन किया जा रहा है। किसी तरह का सहयोग या चंदा नहीं लिया गया है। टीम का कहना है कि बाबा महाकाल की सेवा में किया गया हर प्रयास उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
नए साल पर जब श्रद्धालु महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचेंगे, तो डमरुओं की सजावट और रुद्राक्ष की आभा उन्हें एक अलग ही अनुभूति देगी। यह श्रृंगार न सिर्फ देखने में भव्य होगा, बल्कि बाबा महाकाल की नगरी को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगा।
