राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के तहत चल रही देशव्यापी प्रवास श्रृंखला में भोपाल इस बार अहम केंद्र बना है। संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत दो दिन तक राजधानी में रहकर समाज के अलग-अलग वर्गों से सीधे संवाद करेंगे। यह प्रवास सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संघ की सौ वर्षों की यात्रा और आने वाले समय की दिशा पर खुली बातचीत का मंच बनेगा।
इन कार्यक्रमों का मूल उद्देश्य संघ की ऐतिहासिक यात्रा को समाज के सामने रखना और वर्तमान सामाजिक हालात पर विचार करना है। साथ ही यह भी चर्चा होगी कि देश और समाज के निर्माण में सामान्य नागरिक की भूमिका क्या हो सकती है। संवाद का स्वरूप ऐसा रखा गया है, जिसमें सवाल-जवाब और अनुभव साझा करने की पूरी गुंजाइश होगी।
चार बड़े आयोजन
इस दो दिवसीय प्रवास में कुल चार प्रमुख कार्यक्रम रखे गए हैं। हर कार्यक्रम अलग वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि समाज की विविध आवाजें एक ही मंच पर सुनी जा सकें। युवा, सामाजिक नेतृत्व और मातृशक्ति तीनों को इसमें खास जगह दी गई है। पहला कार्यक्रम प्रांत स्तरीय युवा संवाद का है, जो कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित होगा। इसमें मध्यभारत प्रांत के 31 जिलों से चुने गए ऐसे युवा शामिल होंगे, जिन्होंने शिक्षा, सेवा, नवाचार या सामाजिक कार्यों में पहचान बनाई है। इस मंच पर राष्ट्रनिर्माण, जिम्मेदारी और मूल्यों जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा होगी।
समाज के प्रभावशाली चेहरे
शुक्रवार शाम को रविन्द्र भवन में प्रमुखजन गोष्ठी होगी। इसमें शिक्षा, व्यापार, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली लोग शामिल होंगे। यहां संघ की शताब्दी यात्रा, सामाजिक समरसता और आज की चुनौतियों पर विचार साझा किए जाएंगे। शनिवार सुबह सामाजिक सद्भाव बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि एक साथ बैठेंगे। बैठक का फोकस सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और विश्वास को मजबूत करने पर रहेगा। यह कार्यक्रम संवाद के जरिए दूरी कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मातृशक्ति से शक्ति संवाद
प्रवास का समापन मातृशक्ति के साथ संवाद से होगा। इस बैठक में परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा होगी। महिला सहभागिता और नेतृत्व के नजरिए से यह कार्यक्रम खास माना जा रहा है। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के चलते समाज में इसे जानने-समझने की उत्सुकता बढ़ी है। भोपाल का यह प्रवास इसी जिज्ञासा को संवाद में बदलने का प्रयास है, जिसे वैचारिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
