इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के मामले में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने MP की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक तरफ सत्तापक्ष बयान को संभालने में जुटा दिखा, तो दूसरी ओर विपक्ष ने इसे संवेदनहीनता करार देते हुए सड़क से सदन तक विरोध तेज कर दिया। मंत्री के बयान के खिलाफ भोपाल में महिला कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मंत्री के सरकारी निवास के बाहर पहुंचीं और विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान पूरे इलाके में नारेबाजी गूंजती रही, जिससे माहौल पूरी तरह गर्म हो गया।
महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता हाथों में घंटियां लेकर मंत्री निवास पहुंचीं और घंटी बजाकर अपना आक्रोश जताया। इस प्रतीकात्मक विरोध के जरिए उन्होंने सरकार और मंत्री दोनों को जगाने का संदेश देने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान इस्तीफे की मांग के नारे लगातार लगाए गए।
जूते-चप्पलों से जताया गुस्सा
प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस नेत्रियों ने मंत्री की तस्वीर पर जूते-चप्पल बरसाए। यह दृश्य विरोध की तीव्रता को साफ दिखा रहा था। मौके पर कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना भी मौजूद रहे, जिन्होंने कार्यकर्ताओं का समर्थन किया।
पीसी शर्मा का तीखा हमला
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि इंदौर जैसी दर्दनाक घटना के बाद इस तरह का बयान सत्ता के अहंकार को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं को लगता है कि ऐसे बयानों का कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जनता सब देख रही है। उन्होंने मृतकों के परिजन को सरकारी नौकरी और 1 करोड़ रुपए मुआवजे की मांग भी उठाई। जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष कंसाना ने कहा कि यह प्रदर्शन किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के सम्मान के लिए है। उनका कहना था कि जब लोग अपनों को खो चुके हों, तब जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का बयान बेहद सोच-समझकर आना चाहिए।
#भागीरथपुरा की दर्दनाक घटना पर संवेदना दिखाने के बजाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपशब्दों की भाषा चुनी—यह सत्ता की संवेदनहीनता और घमंड की पराकाष्ठा है। pic.twitter.com/YdJUGv7hSf
— Madhyapradesh mahila congress (@mppmc1234) January 1, 2026
इंदौर की त्रासदी ने झकझोरा प्रदेश
इंदौर में दूषित पानी पीने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं। सैकड़ों लोग अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कल गाली दे रहे थे, आज हँस रहे हैं।
हमारे स्वच्छ इंदौर में गंदा पानी पीने से 13 लोगों की मौत हो गई, 1400 से ज़्यादा लोग बीमार हो गए, और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हँसते हुए दिखाई दे रहे हैं।
इतना अहंकार तो रावण में भी नहीं था, जितना भाजपा के मंत्रियों में लोगों को ज़हरीला पानी… pic.twitter.com/89TunQnbpd
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) January 1, 2026
‘घंटा’ टिप्पणी से बढ़ा विवाद
इसी मामले में मंत्री की ‘घंटा’ वाली प्रतिक्रिया सामने आने के बाद विरोध और तेज हो गया। विपक्ष का आरोप है कि यह टिप्पणी पीड़ितों के दर्द का मजाक उड़ाने जैसी है। इसी वजह से कांग्रेस और महिला कांग्रेस ने मंत्री के इस्तीफे की मांग को और मुखर कर दिया है।
