MP की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इस बार वजह बने हैं लाड़ली बहना योजना के सूत्रधार और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान। रायसेन में कॉलेज छात्रों से संवाद के दौरान शिवराज ने जब मंच से “लाड़ला भांजा योजना” पर विचार की बात कही, तो यह बयान पल भर में सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया। बयान सामने आते ही सत्ता और विपक्ष, दोनों खेमों में हलचल तेज हो गई।
कॉलेज परिसर में युवाओं को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जिस तरह लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं को आर्थिक संबल दिया, उसी तरह भविष्य में युवाओं के लिए भी नए विकल्पों पर सोचा जाना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने “लाड़ला भांजा” शब्द का इस्तेमाल किया। हालांकि उन्होंने इसे एक विचार के रूप में रखा, लेकिन मंच से निकले इस शब्द ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी।
MP सियासी असर
मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना को शिवराज सिंह चौहान की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में गिना जाता है। इस योजना ने न सिर्फ लाखों महिलाओं को सीधा लाभ दिया, बल्कि चुनावी राजनीति में भी इसका गहरा असर देखने को मिला। ऐसे में ‘लाड़ला भांजा’ जैसी संभावित योजना का जिक्र होते ही इसे आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जाने लगा है। शिवराज के बयान पर विपक्ष ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेताओं ने इसे “नाम बदलने की राजनीति” करार देते हुए सवाल उठाए कि क्या सरकार के पास रोजगार, शिक्षा और महंगाई जैसे मुद्दों पर ठोस नीति है या नहीं। कुछ नेताओं ने कहा कि योजनाओं के नाम से ज्यादा जरूरी है उनका वास्तविक क्रियान्वयन और जरूरतमंदों तक पहुंच।
भाजपा में भी चर्चा का दौर
भाजपा के भीतर भी इस बयान को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ नेताओं का मानना है कि यह युवाओं से जुड़ने का एक भावनात्मक और राजनीतिक संदेश है, जबकि कुछ इसे केवल एक संवादात्मक टिप्पणी बता रहे हैं, जिसे जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है। हालांकि पार्टी स्तर पर अभी इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। शिवराज के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी ‘लाड़ला भांजा’ ट्रेंड करने लगा। युवा वर्ग में इसे लेकर उत्सुकता दिखी कि आखिर यह योजना किस वर्ग के लिए होगी और इसका स्वरूप क्या हो सकता है। वहीं, कुछ लोगों ने इसे चुनावी मौसम से पहले का सियासी संकेत बताया।
राजनीतिक संकेत
फिलहाल, यह साफ नहीं है कि ‘लाड़ला भांजा योजना’ वास्तव में किसी नीति का रूप लेगी या यह सिर्फ एक विचारात्मक बयान था। लेकिन इतना तय है कि शिवराज सिंह चौहान के इस एक वाक्य ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है, जो आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
