सतना जिले में अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए रीवा संभाग के आईजी गौरव राजपूत और सतना पुलिस अधीक्षक लगातार सख्ती के दावे कर रहे हैं। कई इलाकों में इसका असर भी दिखा है, लेकिन रामपुर विधानसभा के कोटर थाना क्षेत्र की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। यहां की पुलिस कार्यशैली अब आम चर्चा का विषय बन चुकी है।
24 दिसंबर को खाम्हा ग्राम पंचायत की सरपंच ममता प्रेमलाल द्विवेदी ने कोटर थाने में अवैध शराब बिक्री को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि इस शिकायत पर न तो मौके पर जांच की गई और न ही किसी तरह की कार्रवाई हुई। शिकायत के बाद भी शराब का कारोबार पहले की तरह चलता रहा, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती चली गई।
नहीं टूटी चुप्पी
शिकायत के कुछ समय बाद शराब माफियाओं की एक गाड़ी से हुए हादसे में एक युवक की जान चली गई। यह घटना पूरे क्षेत्र को झकझोरने वाली थी। इसके बावजूद कोटर थाना पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम उठता नहीं दिखा। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था। मामला यहीं नहीं रुका। अब सरपंच द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि शिकायत करने के बाद उन्हें धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने फिर से पुलिस से सुरक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग की है। सवाल यह उठ रहा है कि जब शिकायतकर्ता ही खुद को असुरक्षित महसूस करे, तो आम ग्रामीणों की स्थिति क्या होगी।
वसूली तक सीमित पुलिस?
क्षेत्रीय लोगों से बातचीत में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि कोटर थाना क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री खुलेआम हो रही है और पुलिस की भूमिका सिर्फ वसूली तक सीमित रह गई है। कार्रवाई के बजाय कथित सांठगांठ की चर्चा हर चौराहे पर हो रही है। कोटर थाने की कार्यशैली को लेकर अब पूरा रामपुर विधानसभा क्षेत्र चर्चा में है। लोगों का कहना है कि जब ऊपर से सख्ती के निर्देश हैं, तब स्थानीय स्तर पर लापरवाही क्यों नजर आ रही है। इससे न सिर्फ पुलिस की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि प्रशासन पर से जनता का भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है।
अब निगाहें उच्च अधिकारियों पर
अब देखना यह है कि शिकायत, हादसे और धमकी के इन आरोपों के बाद उच्च अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं। क्या कोटर थाना पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी या मामला फिर फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, इलाके में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या कानून सबके लिए बराबर है या फिर माफिया कानून से ऊपर हैं?
