इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के खिलाफ उज्जैन में कांग्रेस ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। शहर एवं जिला कांग्रेस कमेटी के संयुक्त आह्वान पर यह प्रदर्शन मुख्यमंत्री निवास के समीप आयोजित किया गया। कार्यकर्ताओं ने घंटा बजाकर सरकार को चेताने की कोशिश की और जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। इस प्रदर्शन में शहर और जिले के कांग्रेसजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। ए-ब्लॉक अध्यक्षों से लेकर युवक कांग्रेस, सेवादल, आईटी सेल, अल्पसंख्यक कांग्रेस और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी मौजूद रहे। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भागीदारी ने इस आंदोलन को राजनीतिक रूप से और मजबूत बना दिया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इंदौर की घटना कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रदेश की जल आपूर्ति प्रणाली की बड़ी विफलता है। उनका कहना था कि जब स्वच्छता में अग्रणी बताए जाने वाले शहर में ऐसा हो सकता है, तो बाकी शहरों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उज्जैन को लेकर चेतावनी
विधायक महेश परमार ने मंच से कहा कि उज्जैन की हालत भी इंदौर से बहुत अलग नहीं है। उन्होंने चेताया कि अगर सरकार ने समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो उज्जैन में भी ऐसे हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि भाजपा की तथाकथित ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार होने के बावजूद शहर को सुरक्षित पेयजल क्यों नहीं मिल पा रहा।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि कार्यकर्ता मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने निकले थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें पहले ही रोक दिया। इसके बाद कांग्रेसियों ने गांधीवादी तरीका अपनाते हुए सड़क पर बैठकर शांतिपूर्ण धरना दिया और नारेबाजी के जरिए अपनी बात रखी।
नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग
विधायक दिनेश जैन ‘बॉस’ ने इंदौर की घटना को सरकार की घोर लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी जनहानि के बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसी क्रम में उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग भी रखी। कांग्रेस कार्यकर्ता छीर सागर से देवास रोड होते हुए रैली के रूप में आगे बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया। इसके बाद घंटा बजाकर विरोध जताया गया और नेताओं ने सड़क पर बैठकर संबोधन दिया। प्रदर्शन के अंत में इंदौर हादसे में जान गंवाने वालों को मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिसके साथ यह विरोध कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुआ।
