भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का सतना दौरा इन दिनों राजनीतिक गलियारों में खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। पन्ना क्षेत्र में उनकी पकड़ को लेकर पहले से चल रही चर्चाओं के बीच सतना में उनकी बढ़ती मौजूदगी ने सियासी हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। समर्थक और विरोधी, दोनों खेमों में इस दौरे को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। पन्ना क्षेत्र में भाजपा के भीतर ही यह चर्चा आम है कि वीडी शर्मा की राजनीतिक जमीन पहले जैसी मजबूत नहीं रही। वहीं, सियासी विरोधियों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नेतृत्व स्तर पर भी उन्हें अब वैसा जलवा और तवज्जो मिलती नहीं दिख रही, जैसी कभी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहते थी। इसी पृष्ठभूमि में सतना दौरे को कई लोग नई रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
सतना में जहां भाजपा के जिलाध्यक्ष को शर्मा का सिपहसालार माना जाता है, वहां उनकी लगातार आवाजाही राजनीतिक तापमान को और बढ़ा रही है। पार्टी के अंदरखाने यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह महज सामान्य दौरा है या इसके पीछे कोई बड़ा सियासी गणित छिपा है। यही वजह है कि हर मुलाकात और हर कार्यक्रम को बारीकी से देखा जा रहा है।
सतना में सियासी जमीन की तलाश?
एक धड़ा यह मानता है कि वीडी शर्मा सतना में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। चर्चा है कि सांसद गणेश सिंह का भविष्य का लक्ष्य मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल होना हो सकता है। ऐसे में लोकसभा की संभावित रिक्त होती सीट को लेकर भी शर्मा अपने लिए संभावनाएं टटोल रहे हैं। इस नजरिए से देखा जाए तो सतना दौरा केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा।
दूसरी ओर, एक अलग तरह की कयासबाजी भी चल रही है। यह चर्चा उद्योगपति वर्ग से निकलकर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि शर्मा का किसी बड़े उद्योगपति से मेल-मुलाकात करना राजनीतिक से ज्यादा आर्थिक निवेश की ओर भी इशारा कर सकता है। खास बात यह रही कि इस दौरान उनका किसी स्थानीय भाजपा नेता या कार्यकर्ता के यहां न जाना भी चर्चाओं को हवा दे गया।
पार्टी के भीतर का नजरिया
भाजपा के भीतर ही इस दौरे को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ इसे संगठनात्मक मजबूती से जोड़ रहे हैं, तो कुछ इसे भविष्य की सियासी चाल मान रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी इस बात को लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर इस दौरे का असली मकसद क्या है। हकीकत चाहे जो भी हो, इतना तय है कि वीडी शर्मा के सतना दौरे ने सर्द मौसम में भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह दौरा केवल चर्चा तक सीमित रहता है या फिर सतना की राजनीति में कोई नया मोड़ लाता है।
