सिनेमा की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो सिर्फ परदे पर नहीं बल्कि दिलों में बस जाते हैं। धर्मेंद्र उन्हीं नामों में से एक थे। मजबूत कद, सादा मुस्कान और ज़मीन से जुड़ा अंदाज़ उन्होंने हर किरदार में अपनी छाप छोड़ी। लेकिन अब जब वह इस दुनिया में नहीं हैं, तो उनके जाने का खालीपन सिर्फ फैंस ही नहीं, उनके परिवार और खासतौर पर हेमा मालिनी के लिए बेहद गहरा है।
धर्मेंद्र के निधन को वक्त बीत चुका है, लेकिन हेमा मालिनी के लिए यह दर्द आज भी उतना ही ताज़ा है। उनका कहना है कि कुछ जख्म ऐसे होते हैं, जो वक्त के साथ भरते नहीं, बल्कि चुपचाप इंसान के साथ चलते रहते हैं। धर्मेंद्र भी उनकी ज़िंदगी का ऐसा ही हिस्सा थे, जो हर सांस में महसूस होते हैं।
आखिरी दिनों की यादें
हेमा मालिनी ने एक बातचीत में बताया कि धर्मेंद्र के आखिरी कुछ हफ्ते परिवार के लिए आसान नहीं थे। उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी और पूरा परिवार उम्मीद और डर के बीच झूल रहा था। अस्पताल के वो दिन, जहां हर कोई बस यही चाहता था कि चमत्कार हो जाए आज भी उन्हें बेचैन कर देते हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार ऐसा हुआ था जब धर्मेंद्र अस्पताल से ठीक होकर लौट आए थे। इस बार भी सबको लगा कि वह फिर से मुस्कुराते हुए घर आ जाएंगे। लेकिन किसे पता था कि यह इंतज़ार हमेशा के लिए अधूरा रह जाएगा।
मातम में बदल गई
धर्मेंद्र का 90वां जन्मदिन पास आ रहा था। घर में हल्की-हल्की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं। परिवार सोच रहा था कि इस खास मौके को सादगी लेकिन प्यार से मनाया जाएगा। खुद धर्मेंद्र भी सब से ठीक से बात कर रहे थे, हौसला दे रहे थे। हेमा मालिनी के जन्मदिन पर उन्हें विश करना, छोटी-छोटी बातों पर मुस्कुराना ये सब अब यादों में कैद हो चुका है। अचानक सब कुछ थम गया और खुशियों की जगह सन्नाटा भर गया। हेमा के शब्दों में, “किसी अपने को इस तरह जाते देखना बहुत तकलीफ देता है, यह दर्द शब्दों में नहीं बताया जा सकता।”
अब भी जिंदा हैं धर्मेंद्र
हेमा मालिनी बताती हैं कि धर्मेंद्र को याद करने के लिए किसी खास तारीख या मौके की ज़रूरत नहीं पड़ती। वह हर दिन, हर पल उनके साथ होते हैं। कभी रसोई में, कभी बैठक में, तो कभी पुराने वीडियो देखते हुए। जब घर में थेपला बनता है, या इडली-सांभर और कॉफी की खुशबू आती है, तो धर्मेंद्र अपने आप याद आ जाते हैं। ये वही चीज़ें थीं, जो उन्हें बेहद पसंद थीं। ऐसे पलों में आंखें भर आना लाज़मी है।
हेमा कहती हैं कि उनके पास धर्मेंद्र के साथ बिताए गए अनगिनत पलों के वीडियो हैं। उन्हें देखना एक तरफ सुकून देता है, तो दूसरी तरफ दिल को और भारी कर देता है। “वीडियो देखते हुए रोना आ जाता है, लेकिन वही आंसू हमें उनसे जोड़े भी रखते हैं,” वह कहती हैं।
बड़ी सच्चाई
हेमा मालिनी मानती हैं कि किसी अपने के जाने के बाद उसे भूलना नहीं, बल्कि यादों में जिंदा रखना ही असली तरीका है आगे बढ़ने का। धर्मेंद्र आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी हंसी, उनका प्यार और उनका सादापन आज भी हर उस दिल में मौजूद है, जिसने उन्हें करीब से जाना।
